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इंडिया में गरीबी घटी है या बढ़ी है? जानिए इस सवाल का जवाब क्या है

1947 में इंडिया की आजादी के वक्त यह माना गया था कि देश की करीब 80 फीसदी आबादी गरीब है। फिर, सरकार की इकोनॉमिक और सोशल पॉलिसी का फोकस गरीबी घटाने पर रहा। लेकिन, आजादी के 75 साल बाद भी इस सवाल का एक जवाब देश के लोगों को नहीं मिल पाया है

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Apr 22, 2023 पर 11:27 AM
इंडिया में गरीबी घटी है या बढ़ी है? जानिए इस सवाल का जवाब क्या है
नीति आयोग यूनाइटेड नेशंस मल्टीडायमेंशनल पवर्टी इंडेक्स का इस्तेमाल करता है। इसमें गरीबी का अनुमान लगाने के लिए तीन मानकों का इस्तेमाल होता है। इसमें हेल्थ, एजुकेशन और स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग शामिल हैं।

एक सवाल को लेकर हमारे बीच अक्सर चर्च होती रहती है। इंडिया में गरीबी (Poverty) घटी है या बढ़ी है? मशहूर इकोनॉमिस्ट्स Angus Deaton और Valerie Kozel ने अपनी बुक The Great Indian Poverty Debate में इस बहस को शामिल किया। Deaton को बाद में कंजम्प्शन, पवर्टी और वेल्फेयर का एनालिसिस करने के लिए नोबेल प्राइज तक मिला। यह मसला एक तरह जहां इकोनॉमिस्ट्स की बहस का मुद्दा रहा है वही दूसरी तरह देश का आम आदमी भी इस सवाल का जवाब जानना चाहता है। खासकर तब जब आजादी के बाद से ही देश की हर सरकार गरीबी हटाने को अपना मिशन बनाती रही हैं। लेकिन, 75 साल बाद भी यह ऐसी बहस है जो खत्म होने का नाम नहीं ले रही।

1947 में 80% आबादी गरीब होने का अनुमान

1947 में इंडिया की आजादी के वक्त यह माना गया था कि देश की करीब 80 फीसदी आबादी गरीब है। फिर, सरकार की इकोनॉमिक और सोशल पॉलिसी का फोकस गरीबी घटाने पर रहा। गरीबी का अनुमान लगाने का काम प्लानिंग कमीशन ने शुरू किया। गरीबी रेखा के सिद्धांत की शुरुआत हुई। इसमें यह तय किया गया कि एक व्यक्ति की अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए कितनी इनकम होनी चाहिए। इसके लिए व्यक्ति के जीवित रहने के लिए न्यूनतम कैलरी की जरूरत को आधार बनाया गया। अलग-अलग राज्यों के शहरी और ग्रामीण इलाकों में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों का अनुमान लगाया गया।

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