देश में बढ़ी गर्मी जानें इकोनॉमी पर हीट वेव की तपिश का क्या होता है असर
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के मुताबिक जलाशयों का घटते स्तर से पीने के पानी और खेती के लिए पानी की जरूरत पर असर पड़ सकता है। यह मॉनेटरी पॉलिसी पर असर के साथ मंहगाई पर भी असर डाल सकता है। रिसर्च फर्म क्वांटईको के विवेक कुमार को लगता है कि एक महीने के भीतर सब्जियों की कीमतें बढ़ जाएंगी
मौसम विभाग के मुताबिक हीटवेव की घोषणा आमतौर पर तब की जाती है जब तापमान वर्ष के उस समय के सामान्य तापमान से 4.5-6 डिग्री सेल्सियस अधिक होता है
भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department (IMD) ने अप्रैल से जून तक अत्यधिक गर्मी की भविष्यवाणी की है। इसका खामियाजा मध्य और पश्चिमी प्रायद्वीपीय भागों को भुगतना पड़ सकता है। जलवायु परिवर्तन के युग में और गर्म लहरें नई सामान्य बात (new normal) बन गई हैं। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कितना कमजोर हो सकता है? ध्यान रखें कि इसका असर भारत की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था पर विशेष रूप से भारी पड़ता है। जो असंगत रूप से बड़ी संख्या में नौकरियां पैदा करती है।
जैसा कि देश भीषण गर्मी के लिए तैयार है। नीति निर्माताओं (policymakers) के सामने अपरिहार्य चुनौती भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करना है। IMF के मुताबिक 45.76 प्रतिशत मजदूर कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में लगे हुए है। जबकि असंगठित क्षेत्र की हिस्सेदारी 83 प्रतिशत है। वास्तव में International Monetary Fund ने कहा कि 92.4 प्रतिशत मजदूर अनौपचारिक सेक्टर में लगे हुए हैं।
स्वास्थ्य के साथ ही पीने और खेती की पानी की हो सकती है किल्लत
सामान्य से अधिक तापमान के कई प्रभाव हो सकते हैं। पहला और शायद सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर इसमें स्वास्थ्य का होता है। जितने मजदूर विभिन्न सेक्टर में काम करते हैं उसका एक बड़ा हिस्सा खुले में काम करता है।
इसके अलावा, अत्यधिक गर्मी का प्रभाव जल भंडार के स्तर पर पड़ता है। जो वर्तमान में अपनी क्षमता से लगभग 35 प्रतिशत तक कम हो गया है। इसका असर फसल की पैदावार पर दिख सकता है। इससे महंगाई पर असर दिख सकता है। ये ग्रामीण आय को प्रभावित कर सकता है। उत्पादकता को कम कर सकता है। निर्माण गतिविधि आदि को प्रभावित कर सकता है।
मौसम विभाग, अपनी वेबसाइट पर, हीटवेव को हवा के तापमान की एक स्थिति के रूप में परिभाषित करता है। ये हीट वेव लंबे समय तक रहने पर मनुष्यों के लिए घातक हो जाती है। मैदानी इलाकों में, यदि अधिकतम तापमान कम से कम 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक और पहाड़ी जिलों के लिए कम से कम 30 डिग्री तक पहुंच जाता है, तो लू की घोषणा की जाती है।
आमतौर पर हीटवेव की घोषणा तब की जाती है जब तापमान वर्ष के उस समय के सामान्य तापमान से 4.5-6 डिग्री सेल्सियस अधिक होता है।
शारीरिक परेशानी और स्वास्थ्य पर प्रभाव के अलावा हीटवेव का अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर भी प्रभाव पड़ता है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार, भारत के 150 प्रमुख जलाशयों में जल स्तर कुल भंडारण क्षमता के 35 प्रतिशत से भी नीचे चला गया है। अप्रैल के पहले सप्ताह तक उपलब्ध पानी 61.801 बिलियन क्यूबिक मीटर था। जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 17 प्रतिशत कम है।
दक्षिण में स्थिति अधिक गंभीर है, जहां क्षेत्र के 42 जलाशयों की क्षमता अब 23 प्रतिशत रह गई है।
घटते जल स्तर को देश भर में कम वर्षा के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। 18 राज्यों में मार्च के बाद से कम या जरा भी बारिश नहीं देखी गई है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने क्या कहा
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि “जलाशयों का घटता स्तर पीने के पानी की जरूरत, खेती की जरूरत को प्रभावित कर सकता है। लू का प्रभाव चारे की खेती, बागवानी, सब्जियों की कीमतों पर पड़ता है। यह मॉनेटरी पॉलिसी पर असर के साथ मंहगाई पर भी असर डाल सकता है।''
महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने इस महीने की शुरुआत में अपनी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में खाद्य महंगाई को चिंता का विषय बताया था। रिसर्च फर्म क्वांटईको के विवेक कुमार को उम्मीद है कि एक महीने के भीतर सब्जियों की कीमतें बढ़ जाएंगी।
इंटरनेशनल फोरम फॉर एनवायरनमेंट का क्या है कहना
इंटरनेशनल फोरम फॉर एनवायरनमेंट, सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी के चंद्रभूषण ने कहा कि शॉर्ट टर्म तकलीफों के अलावा बार-बार असमान मानसून ने मिट्टी की क्वालिटी को बदल दिया है। इससे खेती प्रभावित हुई है। भारत को इसका आकार और भौगोलिक विविधता मदद कर रही है। लेकिन कुछ क्षेत्रों में, जहां गर्मी का प्रकोप अधिक है। किसान गरीबी के जाल में फंस रहे हैं।
इसके अलावा, भीषण तापमान का मतलब है कि चरम गर्मी के घंटों के दौरान निर्माण गतिविधि को रोकना होगा। चंद्रभूषण ने ऑक्यूपेशनल स्ट्रक्चर में बदलाव को हीटवेव का परिणाम बताया।