इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भारत के आर्थिक ग्रोथ के अपने अनुमान को एक बार और घटा दिया है। IMF ने 0.60 फीसदी की कटौती करते हुए वित्त वर्ष 2023 में भारत की GDP (ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट) ग्रोथ के 6.8 फीसदी पर रहने का अनुमान जताया है।
IMF का यह अनुमान, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुमानों से कम है, जिसने बीते सितंबर को भारत की जीडीपी ग्रोथ अनुमान को 0.20 फीसदी घटाकर 7 फीसदी पर रहने का अनुमान जताया था।
IMF ने मंगलवार 11 अक्टूबर को जारी अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट के ताजा अपडेट में कहा कि जीडीपी ग्रोथ में गिरावट "दूसरी तिमाही में उम्मीद से कमजोर और बाहरी मांग में कमी" को दिखाती है।
भारत सरकार के आंकड़ो के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2022) में देश की अर्थव्यवस्था 13.5 फीसदी की दर से बढ़ थी, लेकिन इसमें बेस इफेक्ट का अहम योगदान रहा। हालांकि इसके बावजूद जीडीपी ग्रोथ का यह आंकड़ा, अर्थशास्त्रियों के 15 फीसदी और RBI के 16.2 फीसदी अनुमान से कम रहा रहा था।
IMF ने हालांकि वित्त वर्ष 2024 के लिए भारत के GDP ग्रोथ के अनुमान में कोई बदलाव नहीं किया है और इसे 6.1 फीसदी पर बरकरार रखा है। इससे पहले जुलाई में जारी अपने अपडेट में, IMF ने वित्त वर्ष 2023 और 2024 के लिए भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान में 0.80 फीसदी की कटौती की थी।
ग्लोबल GDP का अनुमान भी घटाया
भारत के अलावा, IMF ने 2023 के लिए ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ को लेकर भी अपने अनुमान घटाया है। एजेंसी ने इसपे पीछे रूस-यूक्रेन युद्ध, महंगाई का दबाव, बढ़ती ब्याज दर और ग्लोबल महामारी का प्रभाव जारी रहना समेत अन्य कारण बताए हैं।
IMF ने मंगलवार को कहा कि ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ रेट अगले साल महज 2.7 फीसदी रहेगी। जबकि जुलाई में इसके 2.9 फीसदी रहने की संभावना जताई गई थी। हालांकि, IMF ने इस साल के लिये ग्लोबर ग्रोथ रेट के अनुमान को 3.2 फीसदी पर बरकरार रखा है। पिछले साल ग्रोथ रेट 6 प्रतिशत रही थी।