IMF on India’s growth rate : इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा (Kristalina Georgieva) ने कहा कि भारत की ऊंची ग्रोथ रेट न सिर्फ इस देश के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए अच्छी खबर है। वह IMF के हालिया वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक में जारी भारत के ग्रोथ रेट अनुमान पर बोल रही थीं।
IMF ने इस सप्ताह की शुरुआत में 2022 में भारत की ग्रोथ रेट 8.2 फीसदी रहने का अनुमान जाहिर किया था। साफ है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था बनी रहेगी, जो चीन की 4.4 फीसदी की अनुमानित ग्रोथ रेट से दोगुनी होगी। आईएमएफ ने 2022 में ग्लोबल ग्रोथ रेट 3.6 फीसदी रहने का अनुमान जाहिर किया है जो 2021 के 6.1 फीसदी से काफी कम है।
भारत तेजी से बढ़ने वाली कुछ अर्थव्यवस्थाओं में शामिल
जॉर्जीवा बुधवार को आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की एनुअल स्प्रिंग मीटिंग के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिपोर्टर्स से बात कर रही थीं। उन्होंने कहा, “भारत ऐसी कुछ अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है तो तेजी से आगे बढ़ रही हैं। मामूली डाउनग्रेड के बावजूद इस साल 8.2 फीसदी ग्रोथ का अनुमान है। यह भारत के साथ ही पूरी दुनिया के लिए पॉजिटिव है, जहां ग्रोथ में सुस्ती एक बड़ी समस्या बनी हुई है।”
आईएमएफ चीफ और सीतारमण की हुई थी मुलाकात
इससे पहले सोमवार को जॉर्जीवा ने शिखर सम्मेलन के मौके पर वाशिंगटन में भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के साथ बैठक की। बैठक के दौरान, दोनों ने वर्तमान जिओपॉलिटिकल हालात और अर्थव्यवस्थाओं पर इसके आर्थिक प्रभाव पर चर्चा की। सीतारमण ने प्रमुख सुधारों और मजबूत मौद्रिक नीतियों के साथ भारत के उदार राजकोषीय रुख का उल्लेख किया, जिससे महामारी के बाद आगे बढ़ने में मदद मिली है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अहम भूमिका निभा रहा भारत
जॉर्जीवा ने कहा कि भारत पहले ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अहम भूमिका निभा चुका है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “महामारी के दौरान टीकों के निर्यात के जरिये भारत ने वैश्विक हित में काम करने की मिसाल पेश की।” उन्होंने कहा, भारत इंटरनेशनल सोलर अलायंस के साथ ही रिन्युएबिल एनर्जी के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उधर, IMF के फाइनेंशियल एडवाइजर और डायरेक्टर (मॉनेटरी और कैपिटल मार्केट डिपार्टमेंट) टोबियास एड्रियन ने कहा कि भारत के लिए मध्यावधि की प्राथमिकताओं में क्रिप्टो एसेट्स का रेगुलेशन और डिजिटल करेंसी पेश करना शामिल हैं। इसके अलावा बैंकिंग क्षेत्र में रेगुलेशन से जुड़ी दूसरी चिंताओं को दूर करने और ग्लोबल इकोनॉमी के साथ एकीकरण जैसे संरचनात्मक मुद्दों पर भी भारत खास जोर दे रहा है। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर IMF भारत को ‘‘एक बेहद पॉजिटिव रूप में देख रहा है।’’