अब IMF ने भी कहा-पूरी दुनिया पर मंडरा रहा मंदी का बड़ा खतरा

आईएमएफ ने अपनी आउटलुक रिपोर्ट में 2022 में वैश्विक अर्थव्यवस्था की ग्रोथ का अनुमान 0.40 फीसदी घटाकर 3.2 फीसदी कर दिया है। 2023 में ग्रोथ के अनुमान को 0.70 फीसदी घटाकर 2.9 फीसदी कर दिया है

अपडेटेड Jul 27, 2022 पर 10:45 AM
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इस साल की शुरुआत में जारी डेटा के मुताबिक, जनवरी-मार्च के दौरान अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 1.6 फीसदी गिरावट आई थी।

International Monetary Fund (IMF) के टॉप इकोनॉमिस्ट Pierre-Olivier Gorinchas ने कहा है कि दुनिया में मंदी आ सकती है। इससे पहले भी एक्सपर्ट्स अमेरिकी इकोनॉमी सहित दुनिया के कई देशों में मंदी आने की आशंका जता चुके हैं। अब आईएमएफ के टॉप इकोनॉमिस्ट ने भी यह बात कही है।

Gorinchas ने 26 जुलाई को लिखे एक लेख में कहा है, "अप्रैल से आउटलुक काफी खराब हुआ है। दुनिया जल्द वैश्विक मंदी के करीब पहुंच सकती है। यह पिछली मंदी के सिर्फ 2 साल बाद होगा।" आईएमएफ ने अपनी आउटलुक रिपोर्ट में 2022 में वैश्विक अर्थव्यवस्था की ग्रोथ का अनुमान 0.40 फीसदी घटाकर 3.2 फीसदी कर दिया है। 2023 में ग्रोथ के अनुमान को 0.70 फीसदी घटाकर 2.9 फीसदी कर दिया है।

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आईएमएफ का वैश्विक अर्थव्यवस्था की ग्रोथ का यह अनुमान सामान्य स्थितियों पर आधारित है। हालात खराब होने पर यह और कम रह सकती है। अगर रूस यूरोप को गैस की सप्लाई बंद कर देता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था की ग्रोथ और कम रह सकती है। ऐसी स्थिति में वैश्विक अर्थव्यवस्था की ग्रोथ 2022 में करीब 2.6 फीसदी रह सकती है। 2023 में यह 2 फीसदी रह सकती है।

उन्होंने कहा, "ऐसी स्थिति (यूरोप को गैस की सप्लाई बंद होने) में अमेरिका और यूरोप दोनों में ही अगले साल ग्रोथ करीब जीरो फीसदी रह सकती है। इसका बाकी दुनिया पर भी असर पड़ेगा।" अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी है। इसलिए वहां मंदी आने का असर दुनिया के दूसरे देशों पर भी पड़ता है।

अमेरिका के जल्द टेक्निकल रिसेशन में जाने की आशंका है। इसकी वजह यह है कि लगातार दो तिमाही जीडीपी में गिरावट आने पर माना जाता है कि अर्थव्यवस्था मंदी में चली गई है। इस साल की शुरुआत में जारी डेटा के मुताबिक, जनवरी-मार्च के दौरान अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 1.6 फीसदी गिरावट आई थी। फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ अटलांटा ने अप्रैल-जून में जीडीपी में 1.6 फीसदी गिरावट की उम्मीद जताई है।

एक तरफ इकोनॉमी की ग्रोथ घट रही है तो दूसरी तरफ हाई इनफ्लेशन का खतरा बरकरार है। फूड और फ्यूल की ऊंची कीमतों को देखते हुए आईएमएफ इनफ्लेशन का अपना अनुमान भी बढ़ाने जा रहा है। उसके मुताबिक, 2022 में ग्लोबल कंज्यूमर प्राइस इनफ्लेशन एवरेज 8.3 फीसदी रहने का अनुमान है। यह अप्रैल में 7.4 फीसदी अनुमान के मुकाबले ज्यादा है। 2023 में कंज्यूमर इनफ्लेशन में अच्छी नरमी आने का अनुमान है। यह 5.7 फीसदी रह सकता है। यह भी अप्रैल में व्यक्त अनुमान के मुकाबले 0.90 फीसदी ज्यादा है।

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