आयकर विभाग ने सोमवार को एक बयान में कहा कि विभाग ने कोलकाता के एक कंस्ट्रक्शन मटेरियल उत्पादक मामले में पश्चिम बंगाल और ओडिशा में जांच की और दिल्ली के एक करदाता के मामले में तलाशी अभियान चलाया

आयकर विभाग ने सोमवार को एक बयान में कहा कि विभाग ने कोलकाता के एक कंस्ट्रक्शन मटेरियल उत्पादक मामले में पश्चिम बंगाल और ओडिशा में जांच की और दिल्ली के एक करदाता के मामले में तलाशी अभियान चलाया
आयकर विभाग ने कहा कि 1 दिसंबर को कोलकाता स्थित ग्रुप की तलाशी में पश्चिम बंगाल और ओडिशा में फैले 20 से अधिक परिसरों की तलाशी की गई और लगभग 100 करोड़ की कुल बेहिसाबी आय का पता चला।
विभाग के मुताबिक तलाशी में ग्रुप द्वारा अपनाए गए कर चोरी के विभिन्न तरीकों का खुलास हुआ। विभाग ने कहा कि दस्तावेजों और डिजिटल डेटा के रूप में बड़ी संख्या में आपत्तिजनक सबूत मिले हैं जिसमें उच्च मूल्य के बेहिसाब नकद भुगतान, बेहिसाब नकद खरीद और बिक्री, उत्पादन को कमतर दिखाने का पता चलता है।
इन खुलासों के प्रारंभिक विश्लेषण से पता चलता है कि समूह द्वारा अपनी प्रमुख कंपनियों के लिए आवास प्रविष्टियां-फर्जी लेनदेन- प्रदान करने के लिए कई मुखौटा कंपनियां या फर्जी कंपनियां (shell companies) चलाई जाती हैं। विभाग ने कहा कि इन फर्जी संस्थाओं को शेयर पूंजी या असुरक्षित कर्ज की आड़ में बेहिसाब धन को उनके खाते में लौटा दिया गया था। आयकर विभाग की तलाशी में बेहिसाबी नकदी और जेवरात भी बरामद हुए।
वहीं दूसरे मामले दिल्ली के एक करदाता ने एक लाभार्थी ट्रस्ट और कम कर देयता वाली अंतर्निहित कंपनी बनाई थी। पिछले महीने इनके आवास और व्यावसायिक परिसरों पर तलाशी कार्रवाई की गई थी।
मिंट की खबर के अनुसार तलाशी से पता चला कि कम कर देयता वाले इन अघोषित संस्थाओं के पास अचल और चल संपत्ति के रूप में 40 करोड़ की रुपये की संपत्ति थी। विभाग ने कहा कि करदाता भारत में शाखाओं वाले एक विदेशी बैंक की हैंडलिंग सर्विसेज का फायदा उठा रहा था।
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