इंडिया में चीन से इनवेस्टमेंट और इंपोर्ट को कंट्रोल करने के लिए भले ही कोशिशें जारी हैं, लेकिन इस बारे में सरकार की तरफ से कोई व्यापक योजना नहीं बनाई गई है। वरिष्ठ अधिकारियों ने मनीकंट्रोल को यह जानकारी दी है। अभी दोनों ही देश सीमा पर तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
इंडिया और चीन के आर्थिक संबंध जून 2017 से अच्छे नहीं हैं। तब सिक्किम की नथांग घाटी और भूटान सीमा पर सड़क का विस्तार करने की चीन की कोशिशों का इंडिया ने विरोध किया था। फिर, दोनों देशों की सेनाओं में टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी। फिर, साल 2000 में सिक्किम और लद्दाख की पैंगोंग और गलवां घाटी में बगैर उकसावे के चीनी सैनिकों के हमले के बाद दोनों देशों के बीच सभी द्विपक्षीय बातचीत टूट गई थी।
तब से सरकार ने चीन से होने वाले इनवेस्टमेंट पर शिकंजा कसना शुरू किया था। सरकार ने इंडिया में चीन की कंपनियों के अनैतिक व्यापार के तरीकों पर भी कार्रवाई की है। चीन की मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनी ओप्पो के खिलाफ की गई कार्रवाई इसका उदाहरण है।
सरकार ने इंडिया में ओप्पो के बिजनेस को लेकर कंपनी को 4,389 करोड़ रुपये का शो-कॉज नोटिस भेजा है। कंपनी पर इंडिया में टैक्स छूट का गलत तरीके से फायदा उठाने और कस्टम ड्यूटी नहीं चुकाने का आरोप है। सरकार ने एंड्रॉयड और एपल प्ले स्टोर से कम से कम 107 चाइनीज एप पर भी प्रतिबंध लगा दिए हैं।
एक सीनियर अधिकारी ने बताया इसके बावजूद चीन के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है। कॉमर्स डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने कहा, "लद्दाख हिंसा के बाद पहले चरण में टैरिफ बढ़ाने और निवेश पर अंकुश लगाने जैसे उपाय किए गए थे। उसके बाद से सीमा पर तनाव को बातचीत जारी है। मुश्किल यह है कि इंडिया के विदेश व्यापार में चीन की बड़ी हिस्सेदारी है। इसमें धीरे-धीरे कमी आएगी।" दोनों देशों के बीच व्यापाक के आंकड़े बताते हैं व्यापार बहुत ज्यादा चीन के पक्ष में झुका हुआ है।
अधिकारियों ने यह माना है कि टैरिफ बढ़ाने, क्वालिटी से जुड़े मानकों को सख्त बनाने, एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने जैसे कई उपायों के बावजूद चीन से इंडिया का इंपोर्ट पहले की तरह जारी है। असल में यह बढ़ा है। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में यह 94 अरब डॉलर के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। यह इससे एक साल पहले के मुकाबले 45 फीसदी ज्यादा है।