इंडिया के दो पड़ोसी देशों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। श्रीलंका में तो लोगों ने सरकार के खिलाफ विद्रोह तक कर दिया। उधर, पाकिस्तान आईएमएफ से आर्थिक मदद ले रहा है। हालांकि, इसके लिए आईएमएफ ने कड़ी शर्तें रखी हैं। इसके अलावा पाकिस्तान सरकारी कंपनियों के शेयर मित्र देशों को बेचकर भी पैसे जुटाने की कोशिश कर रहा है।
सवाल है कि क्या इंडिया में भी श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे हालात बन सकते हैं? RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने इस बारे में विस्तार से बताय है।
राजन ने कहा है कि इंडिया में श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे हालात नहीं बनेंगे। इसकी कई वजहें हैं। उन्होंने कहा कि इंडिया का विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त है। इंडिया पर विदेशी कर्ज का बोझ कम है। सबसे महत्वपूर्ण यह कि इंडियन इकोनॉमी में श्रीलंका और पाकिस्तान जैसी प्रॉब्लम नहीं है।
RBI के पूर्व गवर्नर ने न्यूज एजेंसी एएनआई के बताया, "हमारे पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है। आरबीआई ने फॉरेक्स रिजर्व बढ़ाकर अच्छा काम किया है। हम श्रीलंका और पाकिस्तान जैसी प्रॉब्लम का सामना नहीं कर रहे हैं। हमारा विदेशी कर्ज भी कम है।"
इंडिया का विदेशी मुद्रा भंडार 22 जुलाई को खत्म हफ्ते में 571.56 अरब डॉलर था। इस साल मार्च के अंत में यह 620.7 अरब डॉलर था। इस साल मार्च के अंत में कर्ज और जीडीपी का रेशियो घटकर 19.9 फीसदी पर आ गया था। पिछले साल मार्च में यह रेशियो 21.2 फीसदी था।
राजन ने कहा कि विदेशी कर्ज और विदेशी मुद्रा भंडार इंडियन इकोनॉमी को लचीला बनाते हैं। इसके उलट श्रीलंका और पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। उनका विदेशी मुद्रा भंडार बहुत घट गया है। विदेशी कर्ज बहुत बढ़ गया है।
हाल में श्रीलंका का विदशी मुद्रा भंडार गिरकर 5 करोड़ डॉलर से नीचे चला गया। इसके बाद श्रीलंका विदेशी कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं रह गया। पाकिस्तान में भी हालात बहुत खराब हैं। पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के डेटा के मुताबिक, 22 जुलाई को खत्म हफ्ते में उसका विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 75.4 करोड़ डॉलर रह गया।
इनफ्लेशन के बारे में राजन ने कहा कि आरबीआई के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने से मुद्रास्फीति के दबाव में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि फूड इनफ्लेशन बढ़ने की वजह सीजनल फैक्टर्स हैं। इसके (फूड इनफ्लेशन) नीचे आ जाने की उम्मीद है।