Montek Singh Ahluwalia : भारत विकसित और विकासशीलदेशों की तुलना में तेजी से आगे बढ़ेगा, लेकिन 1.4 लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए ज्यादा और ज्यादा तेजी से बढ़ने की जरूरत है। योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में यह बात कही। उन्होंने कहा, हमारी इनकम और हमारे लोगों की उम्मीदों को देखते हुए जीवन स्तर, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण, शहरी इलाकों के रहन सहन में हमें सुधार करना चाहिए। ऐसे में, यदि हमारी ग्रोथ नहीं बढ़ेगी तो ऐसा नहीं होगा।
आहलूवालिया ने कहा, “हमें कहीं न कहीं 7 से 8 फीसदी के बीच लक्ष्य रखना चाहिए। हालांकि, इसका हासिल होना या नहीं होना, हमारी नीतियों और दुनिया के हालात पर निर्भर करता है।”
भारत की अर्थव्यवस्था इस वर्ष दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, हालांकि, वैश्विक स्तर पर मॉनेट्री सख्ती के बीच कुछ धीमी हो रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia Ukraine war) से लगातार जोखिम और चीन में महामारी के फिर से बढ़ने से भी दुनिया भर में आर्थिक गतिविधियों को खतरा है।
आहलूवालिया ने कहा, भारत में तेज और समावेशी विकास, राजकोषीय अनुशासन, इन्फ्रास्ट्रक्चर सहित नीति पर एक हद तक सहमति है।
हालांकि, उन्होंने कहा, इसके लिए स्वास्थ्य और शिक्षा पर ज्यादा सरकारी खर्च, जलवायु परिवर्तन पर अनुसंधान, रक्षा व्यय, व्यय प्रबंधन, बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने, ऊंची ग्रोथ हासिल करने के लिए बिजनेस में उतरने और निकलना आसान बनाने सहित कई सुधारों की आवश्यकता है। आहलूवालिया ने कहा, हम चीन की ओर भी देख सकते हैं। उसने घरेलू इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए पिछले दशकों में काफी कुछ किया है।
दुनिया का सबसे मुश्किल काम
आहलूवालिया ने कहा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पास दुनिया का सबसे मुश्किल काम है। वह आम बजट की ओर इशारा कर रहे हैं, जिसे वह अगले कुछ हफ्तों में पेश करने जा रही हैं।
उन्होंने कहा, हर कोई व्यक्ति उनसे चाहता है कि अच्छे खर्च में कटौती न की जाए और हर किसी की राय में अच्छे खर्च में हर तरह की सब्सिडी आती हैं। हर कोई सब्सिडी में कटौती के पक्ष में है। लेकिन कोई खुलकर इससे छुटकारा पाने की बात नहीं कहता है।