एनएसई कोलोकेशन केस में गिरफ्तार आनंद सुब्रमण्यन को आज एक और झटका लगा। दिल्ली की एक विशेष सीबीआई अदालत (Special CBI court in Delhi) ने आज यानी कि गुरूवार 24 मार्च को एनएसई कोलोकेशन घोटाला (NSE Colocation scam) मामले में आनंद सुब्रमण्यन (Anand Subramanian) की जमानत याचिका खारिज कर दी।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (National Stock Exchange (NSE) के तत्कालीन एमडी के सलाहकार, पूर्व ग्रुप ऑपरेटिंग ऑफिसर सुब्रमण्यन इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (Central Bureau of Investigation(CBI) द्वारा गिरफ्तार किए जाने वाले पहले व्यक्ति थे।
विशेष सीबीआई अदालत द्वारा सुब्रमण्यन को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद उन्होंने जमानत के लिए एक आवेदन दिया। 11 मार्च को उनकी जमानत याचिका पर आदेश को सुरक्षित रखा गया था।
आनंद सुब्रमण्यन को कुछ मार्केट प्लेयर्स को कॉलोकेशन सर्विसेस तक अनुचित रूप से पहुंचने की सुविधा प्रदान करने में कथित रूप से भूमिका निभाने के लिए गिरफ्तार किया गया था। इस प्रकार की गोपनीय जानकारी तक अवैध पहुंच बनने से कथित तौर पर ऐसे खिलाड़ियों को अनुचित लाभ मिला था।
सुब्रमण्यन का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि उन्हें मामले में गलत तरीके से फंसाया गया था और सीबीआई द्वारा दर्ज की गई पहली सूचना रिपोर्ट (First Information Report(FIR) में उनके खिलाफ कोई स्पष्ट मामला नहीं बनाया गया था।
सुनवाई के दौरान विशेष सीबीआई न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता पर अफसोस जताया था और भारत की प्रतिष्ठा पर चिंता व्यक्त की थी।
बता दें कि CBI ने 24 फरवरी की आधी रात को आनंद सुब्रमण्यन को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी ने कुछ हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को एक्सचेंज के नेटवर्क सर्वर्स तक कथित अनुचित पहुंच देने के मामले की जांच में आगे बढ़ने के साथ यह कार्रवाई की थी। तब उन्हें 9 मार्च तक के लिए CBI की कस्टडी में भेज दिया गया था।
इसी मामले में एनएसई की पूर्व प्रबंध निदेशक चित्रा रामकृष्ण (Former Managing Director of NSE, Chitra Ramakrishna) सात दिन पुलिस रिमांड में बिताने के बाद न्यायिक हिरासत में हैं। रामकृष्ण की 14 दिन की न्यायिक हिरासत समाप्त हो जाने के बाद उन्हें 28 मार्च को विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाएगा।
इससे पहले सेबी ने हाल में अपने एक आदेश में NSE की पूर्व एमडी और सीईओ रामकृष्ण और रवि नारायण सहित कई पर आनंद सुब्रमण्यन की नियुक्ति में बरती गई अनियमितताओं पर जुर्माना लगाया था।