RBI digital lending Norm : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 10 अगस्त को डिजिटल लेंडिंग को कंट्रोल करने के लिए बुधवार, 10 अगस्त 2022 को इससे जुड़े नियम जारी कर दिए। आरबीआई ने फ्रॉड और गैर कानूनी गतिविधियों के बढ़ते मामलों पर रोक लगाने के लिए ऐसा किया है।
आरबीआई ने कहा कि सभी लोन डिसबर्शन और रिपेमेंट सिर्फ बॉरोअर और रेगुलेटेड एंटिटी के बैंक खातों के बीच होंगे। इन ट्रांजेक्शंस में लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर या किसी थर्ड पार्टी का कोई अन्य या पूल अकाउंट शामिल नहीं होगा।
प्रोसेस के दौरान एलएसबी की दी जाने वाली कोई फीस या चार्जेस सीधे रेगुलेटेड एंटिटी द्वारा दिए जाएंगे, न कि बॉरोअर द्वारा।
जनवरी, 2021 में गठित किया था वर्किंग ग्रुप
RBI ने जनवरी, 2021 में डिजिटल लेंडिंग से जुड़े मुद्दों की स्टडी करने और नियम सुझाने के उद्देश्य से एक वर्किंग ग्रुप का गठन किया था। नवंबर में, वर्किंग ग्रुप ने डिजिटल लेंडर के लिए सख्त नियमों के सुझाव दिए थे। इसमें स्टेकहोल्डर्स के परामर्श से स्थापित एक नोडल एजेंसी के जरिए वेरिफिकेशन प्रोसेस की व्यवस्था शामिल थी। इसमें डिजिटल लेंडिंग क्षेत्र में भागीदारों को कवर करते हुए एक सेल्फ रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन का सुझाव भी दिया गया था।
कुछ नियम सैद्धांतिक रूप से स्वीकार
आरबीआई ने 10 अगस्त की रिलीज में कहा, कुछ नियमों को स्वीकार कर लिया गया जबकि कुछ को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार किया गया है।
पूर्व में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि केंद्रीय बैंक जल्द ही डिजिटल लोन देने वाले ऐप्स के लिए नियम लेकर आएगा। आरबीआई के अनुसार, इन संस्थाओं के लिए नियम लाना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इसमें से कई प्लेटफॉर्म अवैध हैं और बिना प्रमाणिकता के लोन दे रहे हैं। अब ऐसे ऐप्स पर आरबीआई द्वारा लगाम लगाने की तैयारी है।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि डिजिटल कर्ज ऐप द्वारा कर्ज देने के बाद लोगों का ज्यादा उत्पीड़न किया जाता है, जिस कारण कथित रूप से आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं। दास ने कहा था, बहुत जल्द हम एक नियामकीय ढांचे के साथ सामने आएंगे, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लोन देने के संबंध में हमारे सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने में सक्षम होगा।