गिरवी रखा गोल्ड छुड़ाया है RBI ने? 100 टन सोने को वापस लाने की ये है बड़ी वजह

RBI Gold Reserve: करीब 34 साल पहले देश आर्थिक दिक्कतों से जूझ रहा था तो उस समय गोल्ड रिजर्व का एक हिस्सा गिरवी रखा गया था। अब आरबीआई 100 टन गोल्ड वापस ले आया है। अब सवाल ये उठता है कि आरबीआई यह गोल्ड भारत में क्यों लेकर आया है और क्या यह गिरवी रखा हुआ गोल्ड छुड़ाया गया है? अगर यह गोल्ड आरबीआई का अपना है तो आरबीआई इसे भारत में इस समय क्यों लेकर आया है?

अपडेटेड Jun 01, 2024 पर 5:07 PM
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सबसे सुरक्षित एसेट के रूप में समझे जाने वाले गोल्ड की तरफ निवेशक तेजी से भाग रहे हैं और इसमें दुनिया भर के केंद्रीय बैंक भी हैं। (File Photo- Pexels)

RBI Gold Reserve: केंद्रीय बैंक आरबीआई ने अपना 100 टन गोल्ड यूनाइटेड किंगडम (UK) भारत में वापस लेकर आया है। गोल्ड की इतनी भारी मात्रा में आवाजाही वर्ष 1991 यानी करीब 34 साल बाद हुई है। उस समय विदेशी मुद्रा के लेन-देन से जुड़े संकट से निपटने के लिए भारी मात्रा में गोल्ड गिरवी रखा गया था। अब सवाल ये उठता है कि आरबीआई यह गोल्ड भारत में क्यों लेकर आया है और क्या यह गिरवी रखा हुआ गोल्ड छुड़ाया गया है? अगर यह गोल्ड आरबीआई का अपना है तो आरबीआई इसे भारत में इस समय क्यों लेकर आया है और विदेशों में अभी इसका कितना गोल्ड है और क्यों? इन सभी सवालों के जवाब यहां दिए जा रहे हैं।

क्या RBI ने छुड़ाया है गिरवी रखा गोल्ड?

करीब 34 साल पहले देश आर्थिक दिक्कतों से जूझ रहा था तो उस समय दो बार में 20 टन और 47 टन गोल्ड किश्तों में गिरवी रखे गए थे। भारत ने उस समय 40.5 करोड़ डॉलर के लोन के लिए बैंक ऑफ इंग्लैंड के पास अपने गोल्ड रिजर्व का एक हिस्सा गिरवी रखा था। हालांकि तत्कालीन सरकार ने अपनी नीतियों में बड़ा बदलाव किया और इकॉनमी को खोल दिया और इसे वैश्विक बनाया गया। निजीकरण को बढ़ावा दिया गया। इकॉनमी आगे बढ़ी और देश की सेहत मजबूत हुई और भारत ने अपने लोन को नवंबर 1991 तक चुकता कर दिया। हालांकि लोन पूरा होने के बावजूद लॉजिस्टिकल कारणों से इसे वहीं रखना ज्यादा बेहतर समझा, बजाय उसे यहां लाने के। आरबीआई विदेशों में गोल्ड खरीदकर देश में लाने की बजाय विदेश में ही रखता है।


वित्त वर्ष 2024 के आंकड़ों के मुताबिक आरबीआई के पास 822.10 टन गोल्ड है जिसमें 413.79 टन गोल्ड अभी भी विदेशों में है। देश में अब 100 टन गोल्ड को मिलाकर 408 टन से ऊपर गोल्ड हो गया है जिसमें से 308 टन से अधिक गोल्ड जारी होने वाले नोट्स के लिए हैं तो 100.28 टन बैंकिंग डिपार्टमेंट के एसेट के रूप में हैं। इन आंकड़ों से समझ सकते हैं कि आरबीआई ने अपना ही गोल्ड वापस लेकर आया है।

34 साल बाद वापस लाने की क्यों पड़ी जरूरत?

अब सवाल उठता है कि जब विदेशों में गोल्ड रखकर उसका आसानी से ट्रेडिंग और स्वैप में इस्तेमाल हो सकता है और रिटर्न भी कमाया जा सकता है तो इसे वापस लाने की जरूरत क्यों पड़ी? इसकी वजह ये है कि देश के बाहर गोल्ड रखने के रिस्क भी हैं। जैसे कि इस समय जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ रहा है और बाहर रखे किसी एसेट्स को फ्रीज कर दिया जाए तो उसका इस्तेमाल जरूरत होने पर भी नहीं हो पाएगा। उदाहरण के तौर पर रुस की विदेश में मौजूद संपत्तियों को पश्चिमी देशों ने जब फ्रीज कर दिया तो रुस के लिए दिक्कतें बढ़ गईं।

वैश्विक टेंशन ने बढ़ाई गोल्ड की चमक

इस समय वैश्विक स्तर पर जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ रही है। इसके अलावा डॉलर पर भरोसा कमजोर हो रहा है और महंगाई भी सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ी है। ऐसे में सबसे सुरक्षित एसेट के रूप में समझे जाने वाले गोल्ड की तरफ निवेशक तेजी से भाग रहे हैं और इसमें दुनिया भर के केंद्रीय बैंक भी हैं। आरबीआई गोल्ड की कितनी ताबड़तोड़ खरीदारी कर रहा है, इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि आरबीआई ने पूरे साल 2023 में जितना गोल्ड खरीदा था. उससे ज्यादा इस साल 2023 के शुरुआती तीन महीने में ही खरीद लिया।

पिछले साल आरबीआई ने 16 टन गोल्ड खरीदा था और इस साल मार्च तिमाही में इसने 19 टन गोल्ड खरीदा। आरबीआई ने जनवरी में करीब 9 टन, फरवरी में 4.7 टन और मार्च में 5.3 टन गोल्ड खरीदा था। जनवरी 2024 में आरबीआई ने अक्टूबर 2023 के बाद से पहली और जुलाई 2022 के बाद सबसे बड़ी खरीदारी की थी। मार्च 2024 के आंकड़ों के मुताबिक आरबीआई का गोल्ड रिजर्व सालाना आधार पर 794.63 टन से बढ़कर 822.10 टन पर पहुंच गया।

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(इनपुट: एजेंसी और आरबीआई)

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