पश्चिम बंगाल में नई सरकार आते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी लगातार बड़े फैसले ले रहे हैं। वहीं उनके एक और फैसले की चर्चा कोलकाता के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में काफी हो रही है। जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्य सचिव रहीं नंदिनी चक्रवर्ती को एक नई और अहम जिम्मेदारी मिलने जा रही है। पश्चिम बंगाल कैडर की आईएएस अधिकारी नंदिनी चक्रवर्ती को ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद अधिकारियों में गिना जाता था। अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव और कामकाज के तरीके की वजह से उन्होंने सरकार में खास पहचान बनाई थी।
मिलने जा रही है बड़ी जिम्मेदारी
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नंदिनी चक्रवर्ती ने पश्चिम बंगाल सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। वह राज्य की गृह सचिव, सूचना एवं संस्कृति विभाग की सचिव और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस की सचिव के पद पर भी काम कर चुकी हैं। पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने कोलकाता के मशहूर लेडी ब्रेबॉर्न कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक किया है। इसके बाद उन्होंने नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की।
मुख्य सचिव बनने के बाद भी नंदिनी चक्रवर्ती का कार्यकाल विवादों से घिरा रहा। जनवरी 2026 में जब उन्हें इस पद पर नियुक्त किया गया, तब राज्य कैडर के कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को पीछे छोड़ दिया गया था। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले को ममता बनर्जी की निजी पसंद माना गया, क्योंकि नंदिनी चक्रवर्ती को उनकी करीबी अधिकारियों में गिना जाता था। हालांकि, मुख्य सचिव के तौर पर उनका कार्यकाल केवल दो महीने ही चल पाया। 15 मार्च 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के कुछ घंटों बाद ही भारत निर्वाचन आयोग ने नंदिनी चक्रवर्ती को मुख्य सचिव के पद से हटा दिया। माना गया कि चुनाव आयोग ने यह कदम चुनाव के दौरान सभी दलों के लिए समान माहौल बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया। पश्चिम बंगाल की सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल नंदिनी चक्रवर्ती की यह विदाई काफी चर्चा में रही।
भाजपा सरकार ने भी जताया भरोसा
अब इस कहानी में एक नया और दिलचस्प मोड़ सामने आया है। नवभारत टाइम्स ने ‘नबन्ना’ यानी पश्चिम बंगाल सचिवालय के सूत्रों के हवाले से बताया है कि नंदिनी चक्रवर्ती को उनके मौजूदा पद ‘विकास कार्यों की प्रधान समन्वयक’ पर ही बनाए रखा गया है। इस पद से सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को रिपोर्ट दी जाती है। हालांकि, अब उन्हें शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार में कुछ नई और बेहद अहम जिम्मेदारियां भी दी गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उनका सबसे बड़ा और तात्कालिक काम पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने की प्रक्रिया को तेज करना होगा। इसके लिए उन्हें सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ को जमीन का सही और बिना रुकावट हस्तांतरण सुनिश्चित करना है।
यह जिम्मेदारी कोई साधारण काम नहीं मानी जा रही है। 11 मई को हुई नई राज्य कैबिनेट की पहली बैठक में ही यह प्रस्ताव पास किया गया था कि बीएसएफ को जमीन सौंपने की प्रक्रिया 45 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाए। इसे नई बीजेपी सरकार की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल माना जा रहा है। साथ ही, यह कदम ममता बनर्जी के शासनकाल की नीतियों से बड़े बदलाव का संकेत भी देता है, क्योंकि उस समय राज्य सरकार और बीएसएफ के रिश्तों में अक्सर तनाव देखने को मिलता था। इसके अलावा, नंदिनी चक्रवर्ती अब पूरे पश्चिम बंगाल में केंद्र सरकार की ओर से चल रही विकास परियोजनाओं की निगरानी भी करेंगी। राजनीतिक रूप से संवेदनशील माहौल में यह जिम्मेदारी उन्हें दिल्ली और ‘नबन्ना’ यानी राज्य सचिवालय के बीच एक अहम कड़ी के रूप में स्थापित करती है।