RBI Monetary Policy: 8 दिसंबर को लगातार पांचवी बार केंद्रीय बैंक RBI (Reserve Bank of India) ने रेपो रेट (Repo Rate) में कोई बदलाव नहीं किया। दिसंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक (MPC Review Meet) में इसे 6.50 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा गया है। आखिरी बार रेपो रेट को फरवरी 2023 में बढ़ाकर 6.50 प्रतिशत किया गया था। इस फैसले से होम लोन की EMI पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। मार्केट को भी ऐसा ही अनुमान था कि RBI इस बार भी दरों को जस का तस ही छोड़ेगा।
RBI गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने नीतिगत दरों पर फैसले का ऐलान करते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स मजबूत बने हुए हैं। जीडीपी के आंकड़े सितंबर 2023 तिमाही में सभी अनुमानों को क्रॉस कर गए। दास ने कहा कि स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी रेट को भी 6.25% पर बरकरार रखा गया है। इसके अलावा मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेट और बैंक रेट को भी 6.75% ही रखा गया है।
MPC मीटिंग 6 दिसंबर को शुरू हुई थी। मीटिंग के नतीजों की घोषणा करते हुए RBI गवर्नर ने बताया कि अक्टूबर से दिसंबर 2023 के लिए खुदरा महंगाई अनुमान को 5.6 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। जनवरी-मार्च 2024 के लिए खुदरा महंगाई के अनुमान को 5.2 प्रतिशत, अप्रैल-जून 2024 के लिए 5.2 प्रतिशत पर बनाए रखा गया है। वहीं जुलाई-सितंबर 2024 के लिए खुदरा महंगाई अनुमान 4 प्रतिशत आंका गया है। चालू वित्त वर्ष 2023-24 में खुदरा महंगाई 5.4 प्रतिशत रहने का अनुमान बरकरार रखा गया है।
RBI का कहना है कि मैन्युफैक्चरिंग में कैपेसिटी यूटिलाइजेशन में बढ़ोतरी हुई है और निजी खपत लगातार बढ़ रही है। RBI ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए जीडीपी ग्रोथ 7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। दास ने कहा कि जीएसटी कलेक्शन, पीएमआई (परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े मजबूत बने हुए हैं। इन सबको देखते हुए चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अक्टूबर की बैठक में अनुमान जताया गया था कि अर्थव्यवस्था इस वित्त वर्ष 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी।
पिछली MPC में क्या फैसला हुआ था
अक्टूबर की बैठक में भी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करते हुए इसे 6.5 प्रतिशत ही छोड़ा था। महंगाई को लेकर RBI गवर्नर ने तब भी कहा था कि इस पर फोकस बना हुआ है। उन्होंने कहा था कि घरेलू और ग्लोबल स्तर पर महंगाई की चिंता अभी भी बनी हुई है और इस वित्त वर्ष 2024 के अंत तक इसके तय टारगेट 4% के पार रहने का अनुमान है। अक्टूबर की बैठक में जीडीपी को लेकर MPC (मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी) ने अनुमान दिया था कि इस वित्त वर्ष यह 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी।