रॉयटर्स द्वारा अर्थशास्त्रियों के बीच कराए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक 8 फरवरी को होने वाली बैठक में अपने प्रमुख ब्याज दर को 6.50 फीसदी पर ही बरकरार रखेगा। इन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आरबीआई कम से कम जुलाई तक दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। गौरतलब कि कुछ विकसित बाजारों के केंद्रीय बैंकों की तरफ से इसके कुछ पहले ही दरों में कटौती के संकेत मिल रहे हैं।
रेपो रेट में कुल 250 आधार अंकों की बढ़ोतरी करने के बाद आरबीआई ने फरवरी 2023 से इसमें कोई बदलाव नहीं किया है। देश में महंगाई काफी हद तक आरबईआई के 2 फीसदी सो 6 फीसदी के लक्ष्य सीमा के भीतर रही है। जिसकी वजह से आरबीआई ने फरवरी 2023 से रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है।
कुछ हफ्ते पहले, आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने विश्वास जताया था कि मौजूदा मौद्रिक नीति महंगाई को उसके 4 फीसदी के मध्यम अवधि के लक्ष्य पर वापस ला सकती है। इस समय महंगाई टालरेंस लिमिट के ऊपरी छोर के करीब है और भारत ने सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था का खिताब बरकरार रखा है, इसलिए निकट भविष्य में दर में कटौती की संभावना नहीं है।
जनवरी-फरवरी में कराए गए इस सर्वे में शामिल 60 अर्थशास्त्रियों में से एक को छोड़कर सभी का मनना था कि केंद्रीय बैंक 6-8 फरवरी की बैठक में रेपो दर 6.50 फीसदी पर बरकरार रखेगा। इसके साथ ही इस सर्वे में शामिल 60 में से 41 अर्थशास्त्रियों (दो तिहाई बहुमत) का मानना है कि आरबीआई कम से कम तीसरी तिमाही तक अपनी मुख्य दर में कोई बदलाव नहीं करेगा।
लगभग दो-तिहाई बहुमत - 60 में से 41 अर्थशास्त्रियों - ने भविष्यवाणी की कि आरबीआई कम से कम तीसरी तिमाही तक अपनी मुख्य दर में कोई बदलाव नहीं करेगा। जबकि दूसरी तरफ ये अंदाजा लगाया जा रहा है की यूएस फेडरल रिजर्व अगली तिमाही में अपनी मुख्य ब्याज दर घटाएगा।
मूडीज एनालिटिक्स में एसोसिएट अर्थशास्त्री अदिति रमन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आरबीआई अगले हफ्ते दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। दरों में कटौती 2024 की दूसरी छमाही में ही शुरू होगी क्योंकि रिटेल महंगाई 4 फीसदी के लक्ष्य के आसपास स्थिर होती दिख रही है। हालांकि महंगाई के 6 फीसदी की ऊपरी सीमा को पार करने का जोखिम बना हुआ है। ऐसे में आरबीआई कमोडिटी और खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर बारीकी से नजर बनाए रख सकता है।
हालांकि आरबीआई की तरफ से दर में पहली कटौती कब होगी इसके बारे में कोई स्पष्ट सहमति नहीं थी। 56 में से 25 अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह कटौती तीसरी तिमाही में शुरू होगी। जबकि केवल 18 अर्थशास्त्रियों को जुलाई से पहले पहली कटौती की उम्मीद थी। आरबीआई इस समय काफी आरामदायक स्थिति में है। अर्थव्यवस्था गोल्डीलॉक्स फेज में बनी हुई है, ग्रोथ मोटे तौर पर डिमांड और महंगाई के दबाव के बिना स्टेबल बनी हुई है।