Retail Inflation : जुलाई और अगस्त के महीनों में सब्जियों की कीमतों के आसमान छूने से खुदरा महंगाई के एक बार फिर 6 फीसदी के ऊपर जाने की आशंका है। जापानी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने यह राय जताई है। अगर ऐसा होता है तो यह रिजर्व बैंक द्वारा तय मुद्रास्फीति के संतोषजनक दायरे से अधिक होगा। सरकार ने रिजर्व बैंक को खुदरा महंगाई दो फीसदी घट-बढ़ के साथ चार फीसदी तक सीमित रखने की जिम्मेदारी दी है। नोमुरा ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि सब्जियों के दाम चढ़ने से सजग हुई सरकार फूड प्रोडक्ट्स की सप्लाई सुधारने के लिए कई कदम उठा सकती है।
गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर रोक
सरकार ने हाल ही में गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर रोक लगाई है। नोमुरा ने कहा, ‘जुलाई और अगस्त में खुदरा महंगाई के 6 फीसदी से अधिक रहने के आसार हैं। इसके पीछे सब्जियों के दाम में आई तेजी की अहम भूमिका होगी। हालांकि हमें उम्मीद है कि सरकार सप्लाई को सुधारने के लिए कदम उठाएगी।’
ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि इस साल के आखिर में कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव और अगले साल अप्रैल-मई में होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए महंगाई को काबू में रखना सरकार के लिए एक राजनीतिक प्राथमिकता भी होगी।
जून में 4.81 फीसदी थी खुदरा महंगाई
जून में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.81 प्रतिशत हो गई जबकि मई में यह 4.31 फीसदी रही थी। इसके लिए खाने-पीने की चीजों की कीमतों में आई तेजी को जिम्मेदार बताया गया था। रिजर्व बैंक ने पिछले साल खुदरा महंगाई के उच्च स्तर पर पहुंच जाने के बाद रेपो रेट में वृद्धि कर मांग पर काबू पाने की रणनीति अपनाई। लगातार कई बार रेपो रेट में वृद्धि की गई और यह चार फीसदी से बढ़कर 6.50 फीसदी पर पहुंच गई। हालांकि पिछली दो द्विमासिक समीक्षा बैठकों में रेपो रेट को स्थिर रखा गया है।