India 2029 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन सकता है। इसकी वजह 2014 से इकोनॉमी हो रहा स्ट्रक्चरल बदलाव है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की रिसर्च रिपोर्ट में यह बात कही गई है। यह रिपोर्ट तब आई है जब इंडिया की इकोनॉमी इंग्लैंड को पीछे छोड़ते हुए दुनिया में पांचवें पायदान पर आ गई है।
SBI की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडिया ने 2014 से जो कदम उठाए हैं, उससे इसकी इकोनॉमी 2029 तक दुनिया में तीसरे पायदान पर आ जाएगी। यह 2014 के मुकाबले 7 पायदान का उछाल होगा। तब इंडिया की इकोनॉमी दुनिया में 10वें पायदार पर थी।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहे अनिश्चितताओं के चलते ग्लोबल इकोनॉमी को 6-6.5 फीसदी ग्रोथ को सामान्य कहा जाएगा। इसमें कहा गया है कि मौजूदा ग्रोथ रेट के हिसाब से इंडियन इकोनॉमी 2027 में जर्मनी और 2029 तक जापान से आगे निकल सकती है।
ग्लोबल जीडीपी में इंडिया की हिस्सेदारी के बारे में यह रिपोर्ट कहती है कि यह अभी 3.5 फीसदी है। 2014 में यह 2.6 फीसदी थी। 2027 तक ग्लोबल जीडीपी में इंडिया की हिस्सेदारी 4 फीसदी से ज्यादा हो जाने की उम्मीद है। अभी ग्लोबल जीडीपी में जर्मनी की हिस्सेदारी 4 फीसदी है।
एसबीआई के चीफ इकोनॉमिस्ट सौम्य कांति घोष ने यह रिपोर्ट तैयार की है। उन्होंने बताया कि चीन में इनवेस्टमेंट में जो सुस्ती आई है, उसका फायदा इंडिया को मिल सकता है। व्यापक स्तर पर लोगों के सशक्त बनने से इंडिया में प्रति व्यक्ति आय बढ़ेगी। यह बेहतर भविष्य में बड़ी भूमिका निभाएगा।
एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया कि इंडियन इकोनॉमी को लेकर जो अनुमान जताया गया है, असल तस्वीर उससे भी बेहतर हो सकती है। इसकी वजह पॉलिसी की दिशा में सही कदम और ग्लोबल भूराजनैतिक हालात में बदलाव है।
घोष ने हाल में पूरे फाइनेंशियल ईयर की ग्रोथ के अनुमान को 7.5 फीसदी से घटाकर 6.8 फीसदी कर दिया था। उन्होंने इस फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ उम्मीद के मुकाबले कम रहने के बाद ऐसा किया। जून तिमाही में जीडीपी की ग्रोथ 13.5 फीसदी रही।
जून तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। इसमें अप्रैल से जून के दौरान सिर्फ 4.8 फीसदी ग्रोथ देखने को मिली। इसके मुकाबले सर्विस सेक्टर का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा।