रिज्यूम बनाने में कभी न करें ये पांच गलतियां, बढ़ जाएगी आपके सेलेक्ट होने की संभावना

औसतन एक एंप्लॉयर एक रिज्यूम पर सिर्फ छह सेकेंड खर्च करता है। इसलिए नौकरी तलाशने वाले व्यक्ति को ऐसा रिज्यूम बनाना चाहिए, जिसे देखते ही पूरी जानकारी मिल जाए

अपडेटेड Aug 18, 2022 पर 12:24 PM
एक स्टडी के मुताबिक, अच्छी तरह से बनाए गए रिज्यूम से व्यक्ति को जॉब मिलने की संभावना 7 फीसदी बढ़ जाती है।

रिज्यूम (Resume) बनाना एक चैलेंजिंग काम है। इसमें आप अपनी उपलब्धियों और प्रोफेशनल ऑब्जेक्टिव के बारे में बताते हैं। एक स्टडी के मुताबिक, अच्छी तरह से बनाए गए रिज्यूम से व्यक्ति को जॉब मिलने की संभावना 7 फीसदी बढ़ जाती है। साथ ही एचआर (HR) से जुड़े लोगों का मानना है कि रिज्यूम में अनावश्यक जानकारी देने से उसकी गंभीरता कम हो जाती है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिज्यूम बनाते वक्त हमें निम्नलिखित पांच गलतियों से बचना चाहिए:

जॉब डिस्क्रिप्शन के बारे में बताने से बचें

औसतन एक एंप्लॉयर एक रिज्यूम पर सिर्फ छह सेकेंड खर्च करता है। इसलिए नौकरी तलाशने वाले व्यक्ति को ऐसा रिज्यूम बनाना चाहिए, जिसे देखते ही पूरी जानकारी मिल जाए। कैरियर एक्सपर्ट और जॉब पोर्टल इंडिड इंडिया के सौमित्र चांद ने कहा कि रिज्यूम ऐसा होना चाहिए, जिससे कैंडिडेट की स्पेशन क्वालिटीज तुरंत पता चल जाए।


उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोग जब अपने वर्क एक्सपीरियंस के बारे में बताते हैं तो अपनी उपलब्धियों की जगह रोजाना के कामकाज के बारे में जानकारी देते हैं।

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उम्मीदवार को अपने काम के महत्व पर फोकस करना चाहिए। उन्हें यह बताना चाहिए कि उन्होंने कंपनी के लिए क्या-क्या किया है। उन कामों के बारे में बताने का कोई मतलब नहीं है जो रुटीन वर्क के हिस्सा हैं।

अनप्रोफेशनल बातों का जिक्र नहीं करें

रिज्यूम में सिर्फ प्रोफेशनल बातों का जिक्र होना चाहिए। मैनेजमेंट कंपनी व्हिजको के हेड ऑफ एचआर केशव जिंदल ने कहा कि हायरिंग मैनेजर कैंडिडेट के बारे में स्पष्ट और संक्षिप्त जानकारी चाहता है। उन्होंने कहा कि खासकर नौकरी शुरू करने जा रहे लोगों को रिज्यूम में ऑब्जेक्टिव या इंट्रोडक्शन सेक्शन डालना जरूरी नहीं है। इसकी वजह यह है कि ऐसा करने का कोई फायदा नहीं है। रिक्रूटर्स ऐसा सीवी चाहते हैं जो देखने में साफ और आंखों को अच्छा लगे।

गैरजरूरी कोर्सेज की चर्चा नहीं करें

गैरजरूरी कोर्सेज और इनटर्नशिप की चर्चा करने से बचना चाहिए। फ्रेशर्स अक्सर ऐसी गलतियां करते हैं। मेकमायहाउस की एचआर हेड आलिफिया जौहर ने कहा, "कई कोर्सेज सिर्फ थियोरेटिकल क्लासेज होते हैं। इनसे कोई प्रैक्टिल एक्सपीरियंस नहीं होता है।" किसी कैंडिडेट का रिज्यूमे में अनावश्यक जानकारी देने का मतलब है कि या तो उसे अनुभव की कमी है या वह असुरक्षित महसूस करता है।

बहुत ज्यादा डेटा देना ठीक नहीं

एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिक्रूटर्स बहुत ज्यादा डेटा को प्रोसेस नहीं कर पाते। फिर वे जरूरी जानकारियों को मार्क कर लेते हैं। फिर उसी आधार पर आगे के फैसले लेते हैं। रिक्रूटर्स यह देखते हैं कि कैंडिडेट ने किस-किस कंपनी में काम किया है। उसने किस-किस प्रोजेक्ट पर काम किया है। केएनआर मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स के फाउंडर कुशाग्र अग्रवाल ने कहा कि रिज्यूम में बहुत ज्यादा डाटा होने से उसे रिजेक्ट किया जा सकता है।

खुद की तारीफ से बचें

कैंडिडेट को उसके एसेसमेंट का काम एक्सपर्ट्स पर छोड़ देना चाहिए। इसलिए अपनी तारीख रिज्यूम में करना ठीक नहीं है। कई लोग खुद को 'Seasoned Professional', 'Accomplished underwriter'या 'teh evangelist'बताते हैं। यह खुद की तारीफ करने जैसा है। इससे फायदे की जगह नुकसान हो सकता है।

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