Laal Singh Chaddha की स्क्रिप्ट 14 साल पहले एक्टर अतुल कुलकर्णी ने लिखी थी।
एक्टर अतुल कुलकर्णी (Atul Kulkarni) को यह याद नहीं कि उन्होंने पहली बार Forrest Gump (FG) कब देखी थी। लेकिन, अपने दिल और दिमाग पर इस फिल्म का असर उन्हें याद है। एक्टर टॉम हैंक्स (Tom Hanks) की इस हॉलीवुड फिल्म को उन्होंने हिन्दी में रूपांतरित किया है। टॉम हैंक्स का किरदार आमिर खान (Aamir Khan) ने निभाया है। इस फिल्म का नाम लाल सिंह चड्ढा (Laal Singh Chaddha) है, जो 11 अगस्त को रिलीज होने जा रही है। यहां पेश है इस फिल्म के बारे में कुलकर्णी से बातचीत का प्रमुख अंश:
आपको इस फिल्म (Forest Gump) को भारतीय दर्शकों के लिए बनाने का ख्याल कैसे आया?
2008 में 'जाने तू... या जाने ना' के प्रीमियर का दिन था। इस फिल्म को आमिर ने प्रोड्यूस किया था। प्रीमियर के बाद हम एक पार्टी में गए। फिर उन फिल्मों के बारे में बात होने लगी जो हमारी पसंदीदा थीं। आमिर और मैंने दोनों ने Forest Gump के बारे में बात की, क्योंकि यह हम दोनों को पसंद थी। अगले दिन मुझे शूटिंग के लिए बाहर जाना था। लेकिन, वह कैंसिल हो गया, जिससे मेरे पास 12 से 15 दिन का वक्त था।
बीती रात की बातचीत अब भी मेरे दिमाग में थी। FG की डीवीडी मेरे डेस्क पर पड़ी थी। मैंने इसे दोबारा देखना शुरू किया। कुछ देर बाद कुछ तस्वीरें मेरे दिमाग में उभरने लगीं। मैं सोचने लगा कि अगर इस फिल्म का कैरेक्टर हिंदुस्तान में जन्मा और यहीं पलाबढ़ा हो तो क्या होगा। मैंने रफ नोट्स बनाने शुरू किए। मैंने इसे लिखने के बारे में सोचा। 10वें दिन मैंने देखा कि स्क्रिप्ट पूरी हो गई है। अगले तीन दिन मैंने इसे एडिट करने में लगाया। करीब 14 साल पहले की यही इसकी कहानी है।
पहली बार आप लिख रहे थे, स्क्रिप्ट लिखना कितना चैलेंजिग था?
लाल सिंह चड्ढा को लिखना सच में बहुत मुश्किल काम था। इसे लिखने के बाद मैं इतना थका हुआ महसूस कर रहा था, जैसे मैंने एक के बाद एक तीन फिल्मों की शूटिंग की हो। दिमागी स्तर पर इसमें बहुत मेहनत शामिल थी। यह काम बड़ा चैलेंजिंग भी था।
दूसरी भाषा की फिल्म को अपनी भाषा में बनाना मुश्किल होता है, लाल सिंह चड्ढा कितनी भारतीय है?
जब लोग इस फिल्म को देखेंगे तो उन्हें लगेगा कि वे एक इंडियन फिल्म देख रहे हैं। उदाहरण के लिए आप गोलगप्पा डायलॉग को ले सकते हैं जो ट्रेलर में भी है। यह मानवीय स्वभाव का फलसफा है, जिसे लाल की मां अपने बेटे को बताती है। इसे इतने आसान तरह से बताया गया है कि हर इंडियन को समझ आएगा। यह एक फिल्म से उसकी फिलोसॉफी को लेकर दूसरी फिल्म बनाने जैसा है। हमने एक तरह से देश का इतिहास एक प्रेम कहानी के जरिए बताया है।
जब आप स्क्रि्ट लिख रहे थे तो आमिर के इनपुट्स क्या थे?
स्क्रिप्ट पूरा होने तक आमिर को पता नहीं था कि मैं ऐसा कर रहा हूं। बेशक आमिर और फिल्म के डायरेक्टर अद्वैत (चंदन) की तरफ से बहुत ही जरूरी इनपुट्स मिले। फिल्म मेकिंग एक टीम वर्क है, जिसके लिए अलग-अलग फील्ड के लोगों का इनपुट्स जरूरी है। आमिर को टेस्ट स्क्रीनिंग्स की आदत है। मुझे नहीं पता, हमने कितनी बार यह किया होगा।
इस फिल्म को बनाने में लंबा वक्त लगा, क्या कभी आपको इसके पूरे होने को लेकर संदेह लगा?
एक व्यक्ति के रूप में मैं किसी चीज से बहुत ज्यादा नहीं जुड़ पाता हूं। दूसरा, इसे एक्टर और प्रोड्यूसर आमिर के लिए लिखा गया था। उन्होंने दो साल तक स्क्रिप्ट नहीं पढ़ी थी। स्क्रिप्ट पूरी होने के बाद मैंने आमिर को फोन किया और बताया कि मैंने आपके लिए एक स्क्रिप्ट लिखी है, जो Forest Gump का adaption है। उन्होंने कहा कि वह इसे पढ़ेंगे, लेकिन वह इसे दो साल तक टालते रहे। एक बार में मैंने उनके पूछा कि वह कब इसे पढ़ने जा रहे हैं? उन्होंने खुलकर बताया कि इसकी वजह यह है कि मैं एक राइटर नहीं हूं। वह मेरे करीब दोस्त हैं और उन्होंने सोचा होगा कि मैंने बेकार स्क्रिप्ट लिखी होगी और अगर उन्हें यह पसंद नहीं आया तो मुझे खराब लगेगा। मैं हंसने लगा और उनसे कहा कि मेरी जिंदगी इस फिल्म पर निर्भर नहीं है और अगर उन्हें यह स्क्रिप्ट पसंद नहीं आई तो हम इसे फेंक सकते हैं।
तब वह पंचगनी में थे। मैं वहां गया और उन्होंने इसे पढ़ीं। जब उन्होंने पूरा पढ़ लिया तो मराठी में कहा कि वह न सिर्फ इसमें एक्ट करेंगे बल्कि इसे प्रोड्यूस भी करेंगे। उन्होंने तुरंत अपनी प्रोडक्शन टीम को बुलाया और तीन नाम रजिस्टर्ड कराने को कहा। इनमें-लाल, लाल सिंह और लाल सिंह चड्ढा शामिल थे। फिर, पारामाउंट पिक्चर्स से FG के राइट्स लेने में 10 साल लग गए। लेकिन, इस सफर में कभी मुझे कोई संदेह नहीं रहा, क्योंकि मुझे पता था कि यह आमिर को बहुत पसंद है। मैं जानता था कि जब वह किसी काम को ले लेते हैं तो फिर उसे पूरा करके छोड़ते हैं।
क्या इसके बाद आप और स्क्रिप्ट्स लिखने के लिए प्रोत्साहित हैं?
मुझे नहीं पता। एक बात तो तय है कि मैं लिख सकता हूं। आमिर साब ने साबित कर दिया है कि अतुल कुलकर्णी स्क्रिप्ट लिख सकता है। इसलिए जब कभी मुझे कुछ लिखने का मन होगा, मैं लिखूंगा। मैं यह नहीं जानता कब और कैसे।