भारत की नाइटिंगेल' के नाम से दुनियाभर में मशहूर लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) ने करीब सात दशक तक हिंदी सिनेमा में फीमेल प्लेबैक सिंगिंग में एकछत्र राज किया। उन्होंने यह कहकर प्रशंसकों का दिल जीत लिया कि उनको अपने शुरुआती दिनों के हर पल आज भी याद है। यह लंबी जर्नी हमारी यादों में बसी हुई है। और मेरे अंदर एक छोटी बच्ची अभी भी है। वो कहीं नहीं गई है।
92 साल की लता मंगेशकर ने ये बातें पिछले साल अक्टूबर में अपने एक नए गाने के रिलीज के समय एक इंटरव्यू में कहीं थी। “ठीक नहीं लगता” यह उस गाने की पहली पंक्ति है, जिसको लता मंगेशकर के फेवरिट गुलजार ने लिखा है। शायद यह उनका आखिरी गाना भी है। इस गाने को अपनी एक प्रस्तावित फिल्म के लिए रिकॉर्ड किया था।
हाल ही में लाइब्रेरी में विशाल भरद्वाज को ये गाना मिला और उन्होंने इस गाने को रिलीज करने के लिए लता मंगेशकर की अनुमति मांगी। इस इंटरव्यू में लता जी ने कहा था कि विशाल ने मुझे बताया कि उनको ये गाना मिल गया और वो इस गाने को रिलीज करने की अनुमित चाहते हैं। इस पर मैंने कहा कि क्यों नहीं, ये तो काफी अच्छा गाना है। आपको से रिलीज करना चाहिए। इसके बाद विशाल भरद्वाज ने गुलजार साहब से बात की। उसके बाद इस गाने की मिक्सिंग नए सिरे से हुई और इसे रिलीज किया गया। अपने करियर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह भगवान का आर्शीवाद है कि उन्होंने जो कुछ भी गाया है, लोगों ने उसे पसंद किया है। क्योकि मुझसे बेहतर गाने वाले और भी लोग हैं।
उन्होंने इस बातचीत में आगे कहा कि मुझे सरस्वती का आशीर्वाद कह सकते हैं। मेरा विश्वास है कि मेरे साथ मेरे माता-पिता मेरे ईस्ट देवता दाई बाबा और भगवीन का आशीर्वाद है। यह उन्हीं का आशीर्वाद है कि मैंने जो कुछ भी गाया है लोगों ने उसे पसंद किया है। नहीं तो मैं हूं क्या। मैं अपने में कुछ भी नहीं हूं। देश में और इंडस्ट्री में मुझसे भी बेहतर सिंगर रहे हैं और हैं। आज मेरे पास जो कुछ भी है उसके लिए मैं अपने माता-पिता और ईश्वर के प्रति कृतज्ञ हूं।