ब्रिटेन से आने वाली कारें होंगी सस्ती! EV पर इंपोर्ट टैक्स घटाने की तैयारी में सरकार

यूनाइटेड किंगडम (UK) से आने वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियां सस्ती हो सकती हैं। यह एक प्रस्ताव के चलते जिसे भारत पेश कर सकती है। इस साल के आखिरी में दोनों देशों के बीच एक मुक्त व्यापार सौदा होने की उम्मीद है और यह सौदा हो जाए, इसके लिए यूके से कुछ इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर आयात शुल्क घटाने का प्रस्ताव भारत रख सकता है

अपडेटेड Nov 08, 2023 पर 5:17 PM

यूनाइटेड किंगडम (UK) से आने वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियां सस्ती हो सकती हैं। यह एक प्रस्ताव के चलते जिसे भारत पेश कर सकती है। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग को जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक इस साल के आखिरी में दोनों देशों के बीच एक मुक्त व्यापार सौदा होने की उम्मीद है और यह सौदा हो जाए, इसके लिए यूके से कुछ इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर आयात शुल्क घटाने का प्रस्ताव भारत रख सकता है। जानकारी के मुताबिक 80 हजार डॉलर से अधिक मूल्य की जो इलेक्ट्रिक गाड़ियां यूके से आएंगी, उसमें से सालाना 2500 पर 30 फीसदी की ही दर से टैक्स लगेगा।

इन गाड़ियों पर अभी कितना है टैक्स

अभी 40 हजार डॉलर मूल्य वाली गाड़ियों पर 70 फीसदी और 40 हजार डॉलर से महंगी गाड़ियों पर 100 फीसदी का इंपोर्ट टैक्स लगता है। वहीं विदेशों में बिना असेंबल की हुई कार खरीदने पर 15 फीसदी से 35 फीसदी का टैक्स देना होता है। सूत्रों के मुताबिक भारत यूके को इंपोर्ट ड्यूटी यानी आयात शुल्क कम करने का प्रस्ताव दे सकता है लेकिन अभी भी इस पर अंतिम फैसला होना बाकी है। सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत पूरी तरह से तैयार उन्हीं ईवी के आयात पर शुल्क में कटौती पर विचार कर रही है जिसकी कंपनी भारत में ही इसे बनाने का वायदा करें। अब अगर ऐसी नीति आती है तो इससे टेस्ला (Tesla) समेत सभी ईवी कंपनियों को फायदा मिलेगा।


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फ्री ट्रेड डील से दोनों देशों को मिलेगा सपोर्ट

यूके और भारत के बीच फ्री ट्रेड टॉक यानी मुक्त व्यापार को लेकर बातचीत में ब्रिटेन की मांग इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर आयात शुल्क में छूट की है। भारतीय प्रधानमंत्री पीएम मोदी और यूके के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने उम्मीद जताई थी कि अक्टूबर के आखिरी में इस पर सहमति बन जाएगी लेकिन अब इसके दिसंबर तक ही पूरे होने की उम्मीद दिख रही है। दोनों देशों को उम्मीद है कि फ्री ट्रेड डील यानी मुक्त व्यापार समझौते से उनके बीच का कारोबार 2030 तक डबल हो जाएगा। इसके अलावा यह भारत में मैनुफैक्चरिंग को बूस्ट करेगा और यूरोपीय यूनियन (EU) से अलग होने यानी ब्रेग्जिट (Brexit) के बाद यूके के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। भारत और यूके के बीच पहले ही कुछ मुद्दों पर बात बन चुकी है जैसे कि ब्रिटिश कारों और स्कॉच व्हिस्की पर टैरिफ घटाना।

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