Explained: इंडिया में कैसे होता है राष्ट्रपति का चुनाव? जानिए किस तारीख को मिलेगा देश को नया राष्ट्रपति

राष्ट्रपति के चुनाव के लिए एक इलेक्टोरल कॉलेज होता है। इसमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल होते हैं। राज्यों की विधानसभाओं के सदस्य भी इसमें शामिल होते हैं

अपडेटेड Jun 10, 2022 पर 3:27 PM
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नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए 15 जून से नॉमिनेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

इलेक्शन कमीशन (Election Commission) ने राष्ट्रपति चुनाव का ऐलान कर दिया है। मतदान 18 जुलाई को होंगे। वोटों की गिनती 21 जुलाई को होगी। वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है। इंडिया में प्रेसिडेंट सरकार का हेड होता है। साथ ही वह सशस्त्र बलों का भी प्रमुख होता है।

इनडायरेक्ट होता है चुनाव

इंडिया में राष्ट्रपति चुनने की प्रक्रिया प्रधानमंत्री के चुनाव से अलग है। प्रधानमंत्री का चुनाव डायरेक्ट होता है। इसका मतलब है कि 18 साल से ज्यादा उम्र के देश के लोग प्रधानमंत्री के चुनाव में हिस्सा लेते हैं। राष्ट्रपति के चुनाव में देश का आम मतदाता हिस्सा नहीं लेता है। इसीलिए इसे इनडायरेक्ट चुनाव कहा जाता है। दरअसल, आम जनता के प्रतिनिधि (सांसद, विधायक) राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं।

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उम्मीदवार बनने के लिए ये हैं शर्तें

राष्ट्रपति चुने जाने के लिए कुछ शर्तें हैं। पहला, व्यक्ति की उम्र 35 साल या इससे ज्यादा होनी चाहिए। लोकसभा का सदस्य चुने जाने के लिए सभी योग्यताएं उसमें होनी चाहिए।

इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्य डालते हैं वोट

राष्ट्रपति के चुनाव के लिए एक इलेक्टोरल कॉलेज होता है। इसमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल होते हैं। राज्यों की विधानसभाओं के सदस्य भी इसमें शामिल होते हैं। दिल्ली और पुद्दुचेरी विधानसभाओं के सदस्य भी इलेक्टोरल कॉलेज का हिस्सा होते हैं। यह ध्यान रखना होगा कि सदन के नोमिनेटेड सदस्य इलेक्टोरल कॉलेज में शामिल नहीं होते हैं।

क्रॉस-वोटिंग का अधिकार

राष्ट्रपति का चुनाव सीक्रेट बैलेट के जरिए होता है। सदन के सदस्यों को क्रॉस-वोटिंग का अधिकार है। राष्ट्रपति का चुनाव सामुनापातिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत पर होता है। इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्यों को वोटिंग के समय अपनी पसंद को वरीयता के हिसाब से बताना पड़ता है।

हर सासंद और विधायक के वोट की वैल्यू

इलेक्टोरल कॉलेज की वैल्यू 10,86,431 वोट की है। हर सांसद या विधायक के वोट की वैल्यू पहले से तय होती है। प्रत्येक सांसद के वोट की वैल्यू 708 तय है। इस बार सांसद के वोट की बैल्यू 708 से घटकर 700 रह सकती है। इसकी वजह यह है कि जम्मू-कश्मीर में अब विधानसभा नहीं है। चुनाव में 50 फीसदी वोट हासिल करने वाला उम्मीद को विजयी माना जाता है।

15 जून से शुरू हो जाएगी प्रक्रिया

चीफ इलेक्शन कमिश्नर राजीव कुमार ने गुरुवार को कहा था कि चुनाव आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए पूरी तरह से तैयार है। नॉमिनेशन की प्रक्रिया 15 जून को शुरू होगी। 29 जून तक नॉमिनेशन किया जा सकता है। नॉमिनेशन वापस लेने की अंतिम तारीश 2 जुलाई है।

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