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क्या कहते हैं देश के फायर सेफ्टी नियम, राजकोट गेमिंग जोन और दिल्ली के अस्पताल में बरती गई लापरवाही

पिछले दो दिनों में आग लगने की 3 बड़ी घटनाएं सामने आई हैं और इनमें 35 लोगों की जान गई है। मरने वालों में बच्चे भी शामिल हैं। गुजरात के राजकोट में 25 अप्रैल को गेमिंग जोन में आग लग गई। कुछ घंटे बाद दिल्ली के एक अस्पताल के बच्चों वाली यूनिट में आग लगने की खबर आई। आग लगने की तीसरी घटना राजधानी के एक रिहायशी कॉम्प्लेक्स में हुई

MoneyControl Newsअपडेटेड May 27, 2024 पर 4:59 PM
क्या कहते हैं देश के फायर सेफ्टी नियम, राजकोट गेमिंग जोन और दिल्ली के अस्पताल में बरती गई लापरवाही
गाइडलाइंस के बावजूद रेजिडेंशियल और कमर्शियल बिल्डिंग फायर सेफ्टी से जुड़े नियमों का पालन नहीं करते।

पिछले दो दिनों में आग लगने की 3 बड़ी घटनाएं सामने आई हैं और इनमें 35 लोगों की जान गई है। मरने वालों में बच्चे भी शामिल हैं। गुजरात के राजकोट में 25 अप्रैल को गेमिंग जोन में आग लग गई। कुछ घंटे बाद दिल्ली के एक अस्पताल के बच्चों वाली यूनिट में आग लगने की खबर आई। आग लगने की तीसरी घटना राजधानी के एक रिहायशी कॉम्प्लेक्स में हुई।

ये घटनाएं दो अलग-अलग शहरों में कुछ घंटों के भीतर हुईं। हालांकि, इन सभी दुर्घटनाओं में एक समानता है। इसमें आग से बचाव के लिए उपाय में लापरवाही बरती गई थी। हमने इन तीन घटनाओं का जायजा लेकर यह पता करने का प्रयास किया है कि भारत में अग्नि सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन का सिलसिला किस तरह से जारी है।

राजकोट से दिल्ली तक, बड़ी चूक

राजकोट के गेमिंग जोन TRP में आग लगने से 28 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 9 बच्चे भी शामिल थे। घटना 25 मई को हुई। छुट्टी का दिन होने वजह से यहां पर काफी लोग इकट्ठा हुए थे। दरसअल, यहां डिस्काउंट पर टिकट मिल रहा था, लिहाजा काफी भीड़ इकट्ठा हो गई थी। घटना के सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि एम्युजमेंट और थीम पार्क में वेल्डिंग का काम चल रहा था, जिस वजह से आगे लगने की घटना हुई। फुटेज से मिली जानकारी के मुताबिक, वेल्डिंग के दौरान चिंगारी उड़ने की वजह से आग लगी। गेमिंग जोन में सिर्फ एक इमरजेंसी गेट था, जबकि ज्यादातर पब्लिक बिल्डिंग में एक से ज्यादा एग्जिट गेट की जरूरत होती है। इसके अलावा, फायर क्लीयरेंस के लिए राजकोट नगर निगम से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NoC) भी नहीं मिला था।

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