Price Cap ends tomorrow on Flight Fare: त्योहारी सत्र के दौरान बहुत से लोग यात्रा करते हैं और इस दौरान हवाई टिकटों पर ढेर सारे ऑफर आते हैं। अभी प्राइस कैप के चलते विमान कंपनियां भारी छूट नहीं दे पा रही हैं लेकिन अब इसका दौर फिर शुरू हो सकता है। कल 31 अगस्त से घरेलू यात्राओं पर प्राइस कैप यानी कि सरकार द्वारा तय अधिकतम और न्यूनतम सीमा को हटा दिया जाएगा। सरकार के इस फैसले का आप पर गहरा असर पड़ेगा क्योंकि अब विमान कंपनियां अपने हिसाब से किराया तय कर सकेंगी। केंद्रीय विमानन मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में इसकी जानकारी दे दी थी कि 27 महीने के अंतराल के बाद प्राइस कैप को 31 अगस्त से हटा लिया जाएगा। नीचे इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब दिए जा रहे हैं।
किराए के सस्ते होने की क्या है संभावना?
कल से प्राइस कैप नहीं होगा, इसका मतलब है कि विमान कंपनियां कोई भी हवाई किराया तय कर सकती हैं। इसका मतलब हुआ कि वे यात्रियों को आकर्षित करने के लिए भारी छूट भी ऑफर कर सकती हैं। प्राइस कैप की स्थिति में विमान कंपनियां ऐसा नहीं कर सकती हैं।
सरकार ने क्यों लगाया था प्राइस कैप
कोरोना महामारी के चलते करीब दो साल पहले हवाई सफर ठप्प हो गया था। इसके बाद जब मई 2020 में इसे दोबारा शुरू किया गया तो सरकार ने घरेलू हवाई सफर के लिए न्यूनतम और अधिकतम किराया तय कर दिया। शुरुआत में सभी सीटों की भरने की अनुमति दी गई और और अक्टूबर 2021 में ही क्षमता की 100 फीसदी सीटें ही भरने की मंजूरी मिली। किराए की न्यूनतम सीमा वित्तीय रूप से कमजोर विमान कंपनियों के हितों की रक्षा के लिए तय गया था जबकि अधिकतम सीमा इसलिए तय किया गया था ताकि यात्रियों को अधिक किराया न चुकाना पड़े। सरकार ने तय किया था कि 40 मिनट से कम की घरेलू यात्रा के लिए विमान कंपनियां 2900 रुपये से कम और 8800 रुपये से अधिक किराया नहीं वसूल सकती हैं। इसमें जीएसटी नहीं शामिल है।
अब वापस क्यों लिया गया यह फैसला
अब केंद्रीय मंत्रालय के आदेश के मुताबिक हवाई यात्राओं के लिए यात्रियों की मांग और घरेलू उड़ानों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस प्राइस कैप को हटाने का फैसला किया गया है। एविएशन मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट कर जानकारी दिया था कि हवाई ईंधन (ATF) की दैनिक मांग और कीमतों के एनालिसिस के बाद यह फैसला लिया गया। एटीएफ की कीमतें पिछले कुछ हफ्ते से रिकॉर्ड लेवल से नीचे फिसल रही हैं। इसके भाव में रूस और यूक्रेन के बीच जंग के चलते तेजी थी।