देश में बारिश का मौसम खत्म होने के कगार पर पहुंच गया है। लेकिन इस बार बेमौसम बारिश से किसानों को काफी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। इस बीच देश में पशुओं के चारे के भाव में बेतहाशा बढ़ोतरी हो गई है। हरे चारे और भूसे की भारी कमी की वजह से चारे के दाम 9 साल के हाई लेवल पर पहुंच गए हैं। पिछले 4 महीनों में ही भूसा के दाम 20 फीसदी बढ़ तक चुके हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगस्त 2022 में भूसा होलसेल प्राइस इंडेक्स 25.54 फीसदी पर पहुंच गया है। वहीं चारे के साथ पशुओं को दिए जाने वाले फीड के दाम भी बढ़ गए हैं। जिससे पशुपालकों के सामने एक बड़ा संकट पैदा हो गया है।
सितंबर महीने में बेमौसम की बारिश से खेतों में खड़ी चारे की फसलों को काफी नुकसान हुआ है। जिससे छोटे पशुपालकों की हालत बेहद खराब हो गई है। सबसे ज्यादा परेशान राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और गुजरात के किसान हैं। इन राज्यों में बेमौसम भारी बारिश के कारण बाजरा और अन्य खरीफ फसलें बर्बाद हो गईं हैं। अब किसानों को दुधारू पशुओं के लिए पशु चारे की चिंता सता रही है। पशुओं के लिए पारंपरिक भोजन गेहूं का भूसा खरीदना किसानों के लिए काफी मुश्किल हो गया है। इसके दाम काफी बढ़ चुके हैं।
हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में गेहूं के भूसे का दाम 2,000 रुपये प्रति क्विंटल तक हो गया है। राजस्थान के गेहूं के दाम 2200 रुपये प्रति क्विंटल हैं। कुल मिलाकर गेहूं और उसके भूसे के दाम करीब एक समान हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यही हालत रहे तो गेहूं के भूसे के भाव गेहूं से ज्यादा हो जाएंगे। वहीं सरसों खली की कीमत भी बढ़कर 3000 रुपये प्रति क्विटंल पहुंच गई है। कुछ दिन पहले इसकी कीमत 1600 रुपये प्रति क्विटंल थी। दिसंबर 2021 के बाद से पशु चारे की कीमत में लगातार इजाफा हो रहा है।
उत्तर प्रदेश के झांसी में ग्रासलैंड एंड फोडर रिसर्च इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर अमरेश चंद्र का कहना है कि हरा चारा 12 से 15 फीसदी कम है। भूसा करीब 26 फीसदी तक कम है। इसी कमी की वजह से भूसा के दाम बढ़ गए हैं। ऐसा नहीं है कि सरकार को चारे की कमी की जानकारी नहीं है। ग्रेटर नोएडा में 14 सितंबर को हुए वर्ल्ड डेयरी समिट में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि चारे का संकट खड़ा हो रहा है।