G20 Summit in Mumbai: भारत में G20 अध्यक्षता (India's G20 Presidency) के तहत शेरपा ट्रैक बैठकों (Sherpa track meetings) के पिछले सप्ताह के पहले दौर के बाद चार दिवसीय G20 डेवलपमेंट वर्किंग ग्रुप (DWG) की बैठक देश की वित्तीय राजधानी मुंबई में शुरू हो चुकी है। फाइनेंस ट्रैक मंगलवार को चर्चाओं के साथ अपनी बैठकें शुरू की। 13 से 16 दिसंबर तक होने वाली ये बैठकें मुंबई में की जाएगी। इसमें G20 के सदस्य, अतिथि देश और आमंत्रित अंतर्राष्ट्रीय संगठन भाग लेंगे। मुंबई ट्रैफिक पुलिस की एडवाइजरी के मुताबिक, दक्षिण मुंबई की कई सड़कें 12 दिसंबर से 16 दिसंबर तक बंद रहेंगी। मुंबई ट्रैफिक पुलिस की ओर से कहा गया है कि यदि आप इन रास्तों से जाते हैं, तो 12-16 दिसंबर के बीच दूसरे रास्ते से जाएं, ताकि आपको परेशानी ना हो।
इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के लिए बड़ा अवसर
मुंबई में बैठक के दौरान भारत के G-20 शेरपा अमिताभ कांत (India G20 Sherpa Amitabh Kant) ने मंगलवार को कहा कि सरकार को आंकड़ों का प्रसार इन्हें खंड-खंड करके करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जानकारियों को पूर्ण रूप में साझा करना ‘ठीक नहीं है।’ साथ ही कांत ने कहा कि शिखर सम्मेलन शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार करने और भारत की सांस्कृतिक प्रतिभाओं को उजागर करने का एक बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि यह G20 के लिए भारत की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का एक अवसर भी है।
महाराष्ट्र में होंगी 15 और बैठकें
इस दौरान कांत ने बताया कि जी20 की 15 और बैठकें महाराष्ट्र में होंगी। उन्होंने कहा कि आज डेवलपमेंट वर्किंग ग्रुप की बैठक है। यहां होने वाली यह पहली बैठक है। महाराष्ट्र में हम 15 और बैठक करेंगे। पूरे भारत में हम 56 शहरों में 215 से ज्यादा मीटिंग करेंगे।
जी-20 विकास कार्यसमूह की बैठक को संबोधित करते हुए कांत ने कहा कि किसी भी देश के लिए विकास लक्ष्यों को पाने के लिहाज से आंकड़े अहम पहलू होते हैं और भारत को इसका लाभ मिला भी है। आंकड़ों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर देते हुए कांत ने आंकड़ों को जुटाने के सरकार के तौर-तरीकों का जिक्र किया।
पूरी डिटेल्स लीक होना ठीक नहीं
कांत ने कहा, ‘सरकारी आंकड़े अपने पूर्ण रूप में उपलब्ध करवाए जाते हैं जो अच्छा नहीं है। हमें इन्हें तोड़ना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि कई बार आंकड़ों की गुणवत्ता भी बहुत खराब होती है और आंकड़ों की गुणवत्ता को बेहतर बनाना बहुत आवश्यक है।
कांत ने कहा कि सरकारी अधिकारियों की प्रवृत्ति आंकड़ों को अपने अधिकार में अपने तक सीमित रखने की होती है, वे इन्हें साझा नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि हमें इस चुनौती से निपटना होगा। ताकि अकादमिक क्षेत्र के लोग और शोधकर्ता आंकड़ों का विश्लेषण कर सकें और बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए इनका उपयोग कर पाएं।