नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने 24 मई को टेक दिग्गज गूगल की विवादास्पद प्ले स्टोर बिलिंग नीति पर रोक लगाने के भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के इनकार के खिलाफ डाली गई अपीलों की सुनवाई 5 जुलाई तक के लिए टाल दी है। यह अपील कुकू एफएम, इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (आईबीडीएफ) और शादी डॉट कॉम द्वारा दायर की गई है।
ऐप डेवलपर्स की ओर से पैरवी हुए वरिष्ठ वकील राजशेखर राव और वकील अबीर रॉय ने एनसीएलएटी को बताया कि Google ने पॉलिसी टर्म को स्वीकार न करने के कारण प्ले स्टोर से ऐप्स को डी-लिस्ट नहीं किया है और सुनवाई की अगली तारीख तक यथास्थिति जारी रहनी चाहिए। उन्होंने अपीलीय न्यायाधिकरण से आग्रह किया कि वह Google से इस आशय का हलफनामा मांगे।
गूगल की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता साजन पूवय्या (Sajan Poovayya) ने कहा कि कंपनी कोई अंडरटेकिमग नहीं देगी। उन्होंने कहा, गूगल ने आज तक प्ले स्टोर से ऐप्स को डी-लिस्ट नहीं किया है और अगली सुनवाई तक ऐसा नहीं कर सकती है।
एनसीएलएटी ने कहा कि अगर गूगल कोई प्रतिकूल कदम उठाता है तो ऐप डेवलपर्स गर्मी की छुट्टियों के दौरान तत्काल आदेश के लिए ट्र्ब्यूनल का रुख कर सकते हैं।
अपने 20 मार्च के आदेश में, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने कहा है कि ऐप निर्माता, Google को उसकी फीस वसूल करने से रोकने पर अंतरिम राहत देने के लिए मामला बनाने में विफल रहे हैं। सीसीआई ने कहा "सूचना देने वाले (ऐप निर्माता) यह साबित करने में भी सफल नहीं रहे हैं कि कैसे विवादित आचरण के चलते अपूर्णीय क्षति होगी जिसकी भारपाई आर्थिक मुआवजे के जरिए ठीक से नहीं हो पाएगी। आयोग इस बात से भी सहमत नहीं है कि बैलेंस ऑफ कन्वीनियंस सूचना देने वालों (ऐप निर्माताओं) के पक्ष में है"।
इस आदेश में Google को भारतीय कंपनियों के ऐप्स को अगर वे कंपनी की भुगतान नीति का पालन करने में विफल रहते हैं तो प्ले स्टोर से हटाने की खुली छूट दी गई है। बता दें कि एनसीएलएटी 1 जून से 30 जून तक गर्मियों के लिए अवकाश पर रहेगा।