गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) काउंसिल की शुक्रवार को लखनऊ में मीटिंग होगी। यह 20 महीनों में पहली बार है कि जब GST काउंसिल की वर्चुअल मीटिंग नहीं हो रही। दिसंबर 2019 के बाद से इसकी सभी मीटिंग वर्चुअल मोड में हुई थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण GST काउंसिल की 45वीं मीटिंग की अध्यक्षता करेंगी।
इस मीटिंग का प्रमुख एजेंडा पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को GST के दायरे में लाने के तरीके पर विचार करना है।
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोरोना के कारण स्थिति के मद्देनजर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को GST के तहत लाना केंद्र सरकार और राज्यों के लिए बहुत मुश्किल फैसला होगा।
पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, लिकर और इलेक्ट्रिसिटी जैसे कुछ विशेष आइटम्स GST में शामिल नहीं हैं क्योंकि इनसे केंद्र और राज्यों को बड़ी मात्रा में रेवेन्यू मिलता है। GST काउंसिल की मीटिंग में पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को GST के तहत लाने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, ऐसा होने पर केंद्र और राज्यों को अन्य प्रोडक्ट्स पर टैक्स को लेकर बड़े समझौते करने होंगे।
पिछले कुछ वर्षों से फ्यूल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और इनडायरेक्ट टैक्स के अधिक रेट इसका बड़ा कारण हैं।
राज्यों की ओर से पेट्रोल और डीजल पर VAT लगाया जाता है, जो केंद्र सरकार की ओर से एक्साइज ड्यूटी लगाए जाने के बाद वैल्यू पर होता है। यह टैक्स पर टैक्स लगने की स्थिति है जिससे कीमत बढ़ जाती है।