Gujju Ben Na Nasta: मुंबई की रहने वाली उर्मिला आशेर (Urmila Asher) पॉजिटिविटी और इंस्पिरेशन की मिसाल हैं। दुखों के पहाड़ को चीरते हुए 75 साल की उम्र में उर्मिला ने जो बिजनेस शुरू किया। वो आज किसी आश्चर्य से कम नहीं है। बुढ़ापे में भी उनका जोश और जुनून देखते बनता है। 18 साल की उम्र में विवाह, 23 साल की उम्र में 3 बच्चों की मां उर्मिला ने शायद सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन वो मुंबई की सफल बिजनेस वुमन और TEDx की स्पीकर बनेंगी। उर्मिला ने अपने बिजनेस को एक साल में ही नई उंचाई दी है।
उर्मिला आशेर को गुज्जू बेन के नाम से जाना जाता है। गुज्जू बेन का हिंदी में अर्थ गुजराती बहन होता है। 75 साल की उम्र में उन्होंने अपने पोते हर्ष के साथ स्नैक्स का बिजनेस शुरू किया था। उर्मिला की प्रोफेशनल लाइफ सुबह 6 बजे से शुरू हो जाती है। वो सूखा नाश्ता, गर्म नाश्ता, ढोकला, नमकीन, अलग- अलग तरह की कुकीज, अचार और ढेर सारी गुजराती डिशेज तैयार करती हैं। फिर इनकी पैकेजिंग के बाद मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में डिलीवरी होती है। महज एक साल में ही उनके किचन की खुशबू मुंबई के साथ-साथ देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंच गई है।
उर्मिला के संघर्ष की कहानी
दरअसल उर्मिला के सफर में उतार चढ़ाव और संघर्ष हर मोड़ पर मिले हैं। लेकिन उन्होंने जिंदादिली से इसका मुकाबला भी किया है। शादी के कुछ साल ही बीते थे कि एक एक्सीडेंट में उनकी ढाई साल की बेटी की डेथ हो गई। उसके कुछ सालों बाद ब्रेन ट्यूमर की वजह से उनके बड़े बेटे की मौत हो गई। कुछ समय के बाद उनके तीसरे बेटे की भी मौत हो गई। एक के बाद एक दुखों का पहाड़ उन पर टूटता गया। लेकिन उर्मिला थीं कि इन सभी दुखों के पहाड़ को चीरते हुए आगे बढ़ती गईं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी।
हालात हैं कि उर्मिला का नहीं छोड़ रहे पीछा
साल 2012 में उनके पोते हर्ष ने MBA किया और एक टूरिज्म कंपनी के साथ काम करने लगे। सबकुछ धीरे धीरे पटरी पर लौट रहा था। हर्ष ने अपनी नौकरी छोड़कर गिफ्टिंग प्रोडक्ट्स का बिजनेस शुरू कर दिया था। अच्छी कमाई हो रही थी। लेकिन साल 2019 में हर्ष दुर्घटना के शिकार हो गए। उन्हें गंभीर चोट आई। कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहे। हर्ष के होठ का निचला हिस्सा कट गया। हादसे के बाद हर्ष घर पर ही रहने लगे। उनका बिजनेस भी ठप पड़ गया। यानी घूम-फिर कर हालात फिर से उर्मिला का इम्तिहान लेने लगे। इसके बाद कोरोना वायरस महामारी ने दस्तक दे दी। घर की अजीविका चलाने के लिए उर्मिला ने स्नैक्स बनाना शुरू किया और हर्ष ने इसे ऑनलाइन बेचने का काम शुरू किया।
उर्मिला बताती हैं कि मुझे बचपन से ही खाना बनाने का शौक था। लिहाजा मैंने गुजराती स्नैक्स बनाना शुरू किया। मुझे सभी गुजराती खाना बनाना आता है। अब उर्मिला को अचार बनाने का बहुत शौक है। सबसे पहले उन्होंने अचार बनाया। हर्ष ने इसकी ऑनलाइन मार्केटिंग की। यह अचार हाथों हाथ बिक गया। यह अचार ही टर्निग पॉइंट साबित हुआ। एक के बाद एक कई ऑर्ड्स आने लगे। यहीं से होममेड स्टार्टअप की शुरुआत हुई। कुछ महीने बाद Gujju ben na nasta नाम से अपनी एक दुकान खोल ली गई। Gujju ben na nasta का मतलब होता है गुजरात की बहन के हाथ का बनाया नाश्ता। आज उर्मिला के हाथ के बने चिप्स, अचार, कुकीज, खाखरा जैसे सभी गुजराती प्रोडक्ट ऑनलाइन मुंबई के बाहर तक भेजे जाते हैं।
एक साल में 45 लाख रुपये की कमाई
उर्मिला के प्रोडक्ट की आज इतनी ज्यादा डिमांड बढ़ गई है कि उसे पूरा करने के लिए उन्होंने एक कमर्शियल किचन लीज पर ली है। उर्मिला ने अपने साथ कुछ लोगों को नौकरी भी दी है। ताकि समय से सप्लाई पूरी की जा सके। सिर्फ एक साल के भीतर उनकी कमाई 45 लाख रुपये पहुंच गई। आशेर ने बताया कि उन्हें हाल ही में TEDx पर अपनी कहानी बयां करने के लिए बुलाया गया था। 77 साल की दादी कहती हैं कि अभी यह हमारा ठहराव नहीं है। अभी हम इस बिजनेस के और आगे बढ़ाएंगे। यह तो बस सिर्फ एक शुरुआत है।