Hathras News: हाथरस में भगदड़ के दौरान दम घुटने से हुई ज्यादा लोगों की मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आईं कई बातें

Hathras Stampede: अस्पताल की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर तिवारी ने बताया कि जिले में औसतन प्रतिदिन चार से पांच शवों के पोस्टमार्टम किए जाते हैं, लेकिन मंगलवार को शवों की संख्या औसत से ‘‘काफी ज्यादा’’ थी, जिसके कारण अस्पताल के कर्मचारियों और अधिकारियों को नियमित समय से ज्यादा काम करना पड़ा

अपडेटेड Jul 03, 2024 पर 7:58 PM
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Hathras News: हाथरस में भगदड़ के दौरान दम घुटने से हुई ज्यादा लोगों की मौत

हाथरस जिले में भगदड़ के दौरान ज्यादातर लोगों की मौत दम घुटने के कारण हुई। पोस्टमार्टम के लिए पड़ोसी जिले एटा में भेजे गए शवों की रिपोर्ट में ये बात सामने आई है। एक सीनियर डॉक्टर ने ये जानकारी दी। हाथरस के फुलरई गांव में मंगलवार को हुई भगदड़ के बाद एटा के जिला अस्पताल के शवगृह में 27 शव लाए गए थे, जबकि कुछ शवों को अलीगढ़ समेत आसपास के इलाकों के अलग-अलग अस्पतालों में भेजा गया। राज्य के रिलीफ कमिश्नर ऑफिस के अनुसार, घटना में 121 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, एटा के अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राम मोहन तिवारी ने बताया, "यहां लाए गए 27 शवों में से 19 का पोस्टमार्टम हो चुका है, जबकि कर्मचारी आधी रात के आसपास 20वें शव का पोस्टमार्टम करने की तैयारी कर रहे थे।"

मरने वालों में महिलाएं ज्यादा


उन्होंने बताया कि छह शवों की पहचान होना बाकी है। तिवारी ने कहा, ‘‘लगभग सभी मामलों में मौत का कारण दम घुटना पाया गया।’’ उन्होंने बताया कि मृतकों में ज्यादातर 40 से 50 साल की उम्र की महिलाएं हैं।

अस्पताल की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर तिवारी ने बताया कि जिले में औसतन प्रतिदिन चार से पांच शवों के पोस्टमार्टम किए जाते हैं, लेकिन मंगलवार को शवों की संख्या औसत से ‘‘काफी ज्यादा’’ थी, जिसके कारण अस्पताल के कर्मचारियों और अधिकारियों को नियमित समय से ज्यादा काम करना पड़ा।

घायलों की कैसी है स्थिति?

इलाज करा रहे लोगों के बारे में तिवारी बताया कि यहां चार मरीज लाए गए थे, जिनमें से एक को प्राथमिक उपचार के बाद ही छुट्टी दे दी गई। बाकी दो खतरे से बाहर हैं और एक गर्भवती महिला का इलाज चल रहा है, जिसकी हालत स्थिर है।

पुलिस क्षेत्राधिकारी (सकीट क्षेत्र) संजय कुमार सिंह ने बताया कि एटा के सरकारी अस्पताल में लाए गए 27 शवों में से 21 की आधी रात तक पहचान हो गई।

सिंह ने बताया कि शवों की पहचान हो जाने के बाद प्रक्रिया पूरी करके उन्हें उनके परिवारों को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मरने वालों में ज्यादातर महिलाएं थीं।

कैसे मची भगदड़?

इस मामले में पुलिस ने मुख्य सेवादार समेत आयोजकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि आयोजकों ने प्रशासन को 80 हजार लोगों के आने की जानकारी दी थी, जबकि सत्संग में ढाई लाख लोग पहुंच गए।

सत्संग के मुख्य प्रवचनकर्ता सूरजपाल उर्फ ‘भोले बाबा’ के प्रवचन के बाद जब वो अपनी गाड़ी में सवार होकर आयोजन स्थल से निकल रहे थे, तभी अनुयायियों ने उनकी गाड़ी के रास्ते से धूल समेटना शुरू कर दिया, जिससे भगदड़ मच गई।

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