स्वयंभू बाबा सूरज पाल उर्फ 'भोले बाबा', जिन्हें हरि साकार के नाम से भी जाना जाता है, उनके शिष्यों को हाथरस ले जाने वाली सैकड़ों बसों में से दो बसें उत्तर प्रदेश से लगभग 400 किलोमीटर दूर, रायबरेली जिले से थीं। इनमें से एक बस में 65 साल के छेदी लाल थे, जो अपनी 34 साल की बेटी रूबी और अपने 5 साल के बेटे के साथ सत्संग में भाग ले रहे थे। कार्यक्रम खत्म होने के बाद अनुयायी बाबा के पैर छूने के लिए टेंट से बाहर निकलने लगें। बताया जाता है कि करीब 2.50 लाख लोग सत्संग में पहुंचे थे। बाबा के पैर छूने की कोशिश में ही भगदड़ मच गई। मंगलवार को हाथरस में हुई दुखद भगदड़ में 121 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों घायल हो गए।
कार्यक्रम स्थल से बाहर निकलने की कोशिश करते समय रूबी भीड़ के नीचे दब गई, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। जब तक उसे पास के अस्पताल में ले जाया जा सका, उसने दम तोड़ दिया। बुधवार सुबह रूबी का शव लेने के लिए हाथरस के जिला अस्पताल के शवगृह में मौजूद उसके पिता लाल ने कहा कि ऐसा लगता है कि उनका जीवन भी खत्म हो गया है।
मेरी बेटी मेरे सामने मर गई
लाल ने कहा, “मेरी बेटी मेरे सामने मर गई। उसका बेटा भी लापता है और हमें नहीं पता कि वो किस हालत में है। वो अपनी मां के बिना कैसे जिंदा रहेगा? इस कार्यक्रम में मैं पहली बार शामिल हुआ था और मुझे दुख है कि मैंने यहां आने का फैसला किया।"
लाल ने राज्य प्रशासन और इतनी ज्यादा भीड़ से निपटने के लिए किए गए इंतजामों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “बाबा के लोग थे, जो भीड़ को काबू कर रहे थे। प्रशासन का कोई भी व्यक्ति नजर नहीं आया। पुलिसकर्मियों की संख्या कम थी और वे मुश्किल से कुछ कर सके। अगर अनुमति दी गई थी, तो सरकार को पर्याप्त व्यवस्था करनी चाहिए थी।”
हमारे परिवार के साथ बहुत अन्याय हुआ
40 साल की राजकुमारी देवी, जो रूबी का शव लेने के लिए लाल के साथ आई थीं, उन्होंने कहा कि उन्हें अस्पताल से लाल का फोन आया और उन्होंने रूबी की मौत के बारे में बताया।
राजकुमारी ने कहा, “वो मेरे साले के बेटे की पत्नी है। वो बहुत छोटी थी और उसका पांच साल का बेटा था। हमारे परिवार के साथ बहुत अन्याय हुआ है और इसे ठीक करने वाला कोई नहीं है। इस त्रासदी से उबरना बहुत ज्यादा मुश्किल है।”
भगदड़ स्थल से नजदीक हेल्थ सेंटर सिकंदर राव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर, परिवार के सदस्य मंगलवार देर रात तक अपने लापता लोगों की तलाश करते रहे।
उनमें से एक पड़ोसी जिले कासगंज का राजेश था, जो अपने मोबाइल फोन पर अपनी मां की तस्वीर लेकर उन्हें ढूंढ रहा था। उसके साथ उसका चचेरा भाई शिवम भी था। दोनों राजेश की मां का पता लगाने के लिए दर-दर भटक रहे थे।
राजेश ने कहा, “मैंने अपने फोन पर एक न्यूज चैनल पर अपनी मां की तस्वीर देखी और उनके शरीर को पहचान लिया। वो हमारे गांव के दो दर्जन और लोगों के साथ यहां कार्यक्रम के लिए आई थीं।”
अंशू और पाबल कुमार अपने चचेरे भाई के लापता पिता 40 साल के गोपाल सिंह को खोजने की उम्मीद में अपने छोटे पिकअप ट्रक में, दूध के खाली कंटेनरों से लदे हुए, CHC के पास इंतजार कर रहे थे।
“वह समागम के लिए गया था लेकिन घर नहीं लौटा। वह स्ट्रीट स्मार्ट नहीं था, उसके पास फोन भी नहीं था। हमें नहीं पता कि वह किस हालत में है,'' अंशू ने कहा।