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'जो गिरे वो उठे नहीं'...'हमारा दम घुट रहा है'... 'पहले बाबा जी जाएंगे फिर भक्त', हाथरस भगदड़ की डरावनी कहानी पीड़ितों की जुबानी

Hathras Stampede: इस भगदड़ में बचे लोगों ने बताया कि ये घटना 'सत्संग' खत्म होने के बाद हुई, जिसे स्वयंभू संत नारायण साकार विश्व हरि, जो खुद को 'भोले बाबा' भी कहते हैं, संबोधित कर रहे थे। वो 'सत्संगों' में सूट और टाई पहनता है और दावा करता है कि वो पहले पुलिस में था। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि भगदड़ तब हुई जब लोग 'भोले बाबा' के चरणों की 'रज' (धूल) लेने के लिए उनके पीछे दौड़े

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 03, 2024 पर 9:56 PM
'जो गिरे वो उठे नहीं'...'हमारा दम घुट रहा है'... 'पहले बाबा जी जाएंगे फिर भक्त', हाथरस भगदड़ की डरावनी कहानी पीड़ितों की जुबानी
Hathras Stampede: हाथरस जिले के सिकंदराराऊ अस्पताल के बाहर एक रिश्तेदार के शव के पास रोती महिलाएं

'भोले बाबा' के चरणों की धूल, जिसे लोकस भाषा में 'रज' कहा जाता है, उसे लेने के लिए दौड़ते लोग, दमघोंटू और उमस भरे माहौल से बाहर निकलने की कोशिश और बाबा के सेवादारों ने बिना ये जाने कि इसका नतीजा कितना घातक हो सकता है, बाहर निकलने का रास्ता ब्लॉक कर दिया.. ये सब वो बड़े कारण रहे, जिनके चलते जानलेवा भगदड़ मची। उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले की सिकंदा राऊ तहसील के फुलरई गांव में सत्संग में भगदड़ मचने से महिलाओं और बच्चों समेत 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और 250 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

इस भगदड़ में बचे लोगों ने बताया कि ये घटना 'सत्संग' खत्म होने के बाद हुई, जिसे स्वयंभू संत नारायण साकार विश्व हरि, जो खुद को 'भोले बाबा' भी कहते हैं, संबोधित कर रहे थे। वो 'सत्संगों' में सूट और टाई पहनता है और दावा करता है कि वो पहले पुलिस में था। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि भगदड़ तब हुई जब लोग 'भोले बाबा' के चरणों की 'रज' (धूल) लेने के लिए उनके पीछे दौड़े। कुछ लोग उस उमसभरी भीड़भाड़ से बाहर निकलने के लिए भी दौड़ पड़े।

लोग बाबा जी के चरणों की धूल लेने दौड़ पड़े

हाथरस के बिघपुरी मुरसान के रहने वाले कन्हैया लाल ने कहा कि उनकी मां और भतीजी, जो कार्यक्रम में शामिल हुई थीं, फिलहाल गायब हैं। उन्होंने News18 को बताया कि कार्यक्रम वाले पूरे इलाके को दो टेंट में बांटा गया था - एक जिसमें "बाबा जी" बैठे थे, साथ ही कुछ खास भक्त भी थे, जो उनके नजदीक बैठने के लिए पैसा दे सकते थे, जबकि बड़ी भीड़ दूसरे टेंट के नीचे बैठे थे, जो मेन टेंट से कुछ मीटर की दूरी पर था।

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