पश्चिम बंगाल (West Bengal) में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की तृणमूल कांग्रेस (TMC) 2011 में हुगली जिले के सिंगूर (Singur) में भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन की पीठ पर वाम सरकार को हटा कर सत्ता में आई थी। अब बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया कि उन्होंने टाटा (TATA) को राज्य से बाहर नहीं किया था, बल्कि इसके पीछे भी CPM खुद ही थी। बनर्जी ने कहा, "उन्होंने जबरन जमीन का अधिग्रहण किया, मैंने तो इसे असली मालिकों को लौटा दिया।"
सिलीगुड़ी में 'विजय सम्मेलन' को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि वह कारखानों और होटलों का निर्माण करके बंगाल के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना चाहती हैं। राज्य विश्व का पर्यटन स्थल है। इस कार्यक्रम में राज्य के उत्तरी हिस्से के आठ जिलों की प्रमुख हस्तियों और दुर्गा पूजा समितियों को आमंत्रित किया गया था।
बंगाल मुख्यमंत्री ने कहा, "कुछ लोग बकवास कह रहे हैं कि मैंने टाटा को बाहर कर दिया। अब, टाटा नौकरी दे रहा है। यह CPM थी। उन्होंने जबरन जमीन पर दावा किया था। हमने जमीन वापस कर दी। हम किसी भी उद्योगपति के साथ भेदभाव नहीं करते हैं।"
ममता ने यह भी कहा, "जमीन की कोई कमी नहीं है। जोर-जबरदस्ती से जमीन क्यों लें? हमने इतने सारे प्रोजेक्ट किए हैं। हमने कहीं भी जबरदस्ती जमीन नहीं ली है। हमारे यहां जितने उद्योगपति हैं, सभी को बंगाल में निवेश करना चाहिए। बंगाल में रोजगार पैदा करें।"
CPM की केंद्रीय समिति के सदस्य सुजान चक्रवर्ती ने बनर्जी पर पलटवार किया। ABP बांग्ला ने चक्रवर्ती के हवाले से कहा, "ममता बनर्जी वास्तव में सुनना नहीं चाहतीं। यह असहज है ... दुर्गापुर एक्सप्रेसवे को बंद कर दिया गया था, ताकि टाटा सिंगूर में कारखाना न बना सके।"
2006 में, बुद्धदेव भट्टाचार्य के मुख्यमंत्री के रूप में पश्चिम बंगाल में सातवीं वाम मोर्चा सरकार के सत्ता में आने के तुरंत बाद, टाटा मोटर्स ने सिंगूर में Nano फैक्ट्री लगाने की घोषणा की थी।
हालांकि, बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार की तरफ से 'जबरन भूमि अधिग्रहण' का आरोप लगाते हुए परियोजना के खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया।
आखिरकार, अक्टूबर 2008 में, टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा ने सिंगूर से बाहर निकलने की घोषणा की। इसके बाद गुजरात का साणंद नैनो फैक्ट्री का नया ठिकाना बना।