1 अक्टूबर को जारी एक निजी सर्वेक्षण के परिणामों के अनुसार, निर्यात मांग में कमी और उत्पादन घटने के कारण भारत की मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि सितम्बर में घटकर 56.5 के स्तर पर रह गई है जो पिछले महीने 57.5 के स्तर पर थी। सीजनली एडजस्टेड एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स जो वित्त वर्ष की शुरुआत से ही लॉन्ग टर्म एवरेज से ऊपर रहा है, वित्त वर्ष की जून तिमाही में दर्ज 58.2 से काफी नीचे आ गया है।
एचएसबीसी में भारत की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि गर्मियों के महीनों में बहुत मजबूत ग्रोथ के बाद सितंबर में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गति धीमी पड़ गई। उत्पादन और नए ऑर्डर धीमी गति से बढ़े हैं और निर्यात मांग में मंदी देखने को मिली है। नए निर्यात ऑर्डर पीएमआई मार्च 2023 के बाद से सबसे कम कम स्तर पर रहे हैं।
दूसरी तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई औसतन 57.4 पर रहा है जो अक्टूबर-दिसंबर 2023 के बाद सबसे कम स्तर है। दूसरी तिमाही में निर्यात में भी मंदी रही, जिसका असर भी उत्पादन गतिविधियों पर पड़ा। एक पखवाड़े पहले जारी आंकड़ों से पता चला है कि अगस्त में निर्यात में 9.4 फीसदी की गिरावट आई है और यह 34.71 बिलियन डॉलर पर रहा है।
कम मांग के साथ-साथ लागत दबाव भी बढ़ गया है। सर्वेक्षण में शामिल 400 मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने केमिकल, पैकेजिंग, प्लास्टिक और मेटल की कीमतों में बढ़त की बात कही है।
हालांकि, आउटपुट चार्ज में पिछले पांच महीनों में सबसे धीमी बढ़त हुई है, क्योंकि कंपनियों ने लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है। इससे मार्जिन और लाभप्रदता पर दबाव पड़ने की संभावना है, जिसका असर नौकरियों पर पड़ सकता है। भंडारी ने कहा कि मुनाफे में कमजोर बढ़त का कंपनियों की तरफ से होने वाली कर्मचारियों की मांग पर असर पड़ सकता है। रोजगार की गति लगातार तीसरे महीने धीमी रही है।
इन परिस्थितियों ने बिजनेस कॉन्फिडेंस को भी प्रभावित किया है, क्योंकि फ्यूचर आउटलुक पिछले डेढ़ साल में सबसे निचले स्तर पर आ गया है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि करीब 23 फीसदी भारतीय निर्माताओं ने आने वाले वर्ष में उत्पादन में बढ़त का अनुमान लगाया है, जबकि शेष फर्मों ने कोई बदलाव नहीं होने का अनुमान लगाया है।
भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र ने भी बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है। अगस्त में आठ प्रमुख उद्योगों का उत्पादन लगभग चार वर्षों में पहली बार 1.8 फीसदी घटा है। अगस्त में सरकार द्वारा किया गया पूंजीगत व्यय भी पिछले वर्ष की तुलना में 30 प्रतिशत कम रहा है। हालांकि इससे राजकोषीय घाटे पर लगाम लगने की संभावना है, लेकिन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकार को उच्च जीडीपी ग्रोथ के लिए खर्च बढ़ाना होगा।