भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने 65 जोड़ी ट्रेनों यानी 130 ट्रेनों को सुपरफास्ट ट्रेन का दर्जा दे दिया है। इन ट्रेनों को सुपरफास्ट का दर्जा मिलते ही इनके किराए में वृद्धि हो गई है। मेल एक्सप्रेस की तुलना में सुपरफास्ट का ठहराव कम स्टेशनों पर होता है, इसके साथ ही सुपरफास्ट ट्रेनों की स्पीड भी बढ़ जाती है। किराए में बढ़ोतरी की यह व्यवस्था 1 अक्टूबर से लागू कर दी गई है।
रेलवे के नियमों के मुताबिक, 56 किमी प्रति घंटे की औसत रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों को टाइमलाइन में सुपरफास्ट का दर्जा दिया जाता है। चार दशकों से मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की औसत गति 50 से 58 किमी प्रति घंटे है। जबकि रेलवे की प्रीमियम राजधानी, शताब्दी, दुरंतो ट्रेनों आदि की औसत गति 70-85 किमी प्रति घंटे है।
रेलवे मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक, कुल मिलाकर सभी ट्रेन की औसत गति में करीब 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे अतिरिक्त ट्रेन के संचालन के लिए लगभग पांच प्रतिशत अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध हुए हैं।
भारतीय रेल ने अपनी नई अखिल भारतीय रेलवे टाइमलाइन ‘ट्रेन एट ए ग्लांस (टीएजी)’ अपनी वेबसाइट पर जारी की है। यह टाइमलाइन एक अक्टूबर से प्रभावी है। इन ट्रेनों में सफर करने वालों को एक अक्टूबर से पूर्व की तुलना में अधिक किराया चुकाना पड़ रहा है।
रेलवे ने एक बयान में बताया कि AC-1 और एग्जीक्यूटिव कैटेगरी की ट्रेनों में 75 रुपये प्रति यात्री प्रति यात्री किराए में वृद्धि की गई है। इसी तरह AC-2 और AC-3 चेयर कार में 45 रुपये और स्लीपर कैटेगरी की ट्रेनों में 30 रुपये प्रति यात्री किराया बढ़ाया गया है। इससे पहले रेलवे की नई टाइमलाइन में करीब 500 मेल एक्सप्रेस रेलगाड़ियों की रफ्तार तेज कर दी गई थी।