Indian Railways: भारतीय रेलवे का कामकाज इन दिनों तेजी से डिजिटल तरीके से हो रहा है। यात्रियों की सुविधा के लिए भी रेलवे की ओर से कई बड़े बदलाव किए गए हैं। नई टेक्नोलॉजी को तेजी से अपनाया जा रहा है। इसी कड़ी में रेलवे ने सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत की भी शुरुआत की है। आपने देखा होगा कि पहले ट्रेन के गेट में रिजर्वेशन चार्ट चिपका दिया जाता था। इससे कोई भी यात्री अपना नाम देखकर अपनी सीट नंबर पहचान कर लेता था। लेकिन अब यह व्यवस्था पिछले कई सालों से बद कर दी गई है। क्या आप जानते हैं कि आखिर ऐसा क्यों किया गया है?
ट्रेन पर जो चार्ट चिपकाया जाता था। उसमें रिजर्वेशन टिकट की पूरी डिटेल दर्ज रहती थी। उसमें यात्री का नाम, PNR नंबर, सीट नंबर. उम्र, जेंडर सब कुछ लिखा रहता था। इसे ट्रेन में गेट के बाहर चिपका दिया जाता था। जिससे यात्री अपनी सीट नंबर देखकर आगे की यात्रा करते थे। हालांकि अब रेलवे ने यह सुविधा बंद कर दी है।
जानिए चार्ट लगाना कब हुआ बंद
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडियन रेलवे ने साल 2018 में 6 महीने तक रिजर्वेशन चार्ट नहीं लगाने का फैसला किया था। इसके बाद इस व्यस्था को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया। साल 2019 में रेलवे ने रिजर्वेशन चार्ट ऑनलाइन देखने की सुविधा शुरू कर दी। इसके बाद IRCTC की वेबसाइट पर ट्रेन के कोचों और बर्थ का स्टेटस आसानी से देखा जा सकता है। कुल मिलाकर कहने का मतलब ये हुआ कि अब रिजर्वेशन चार्ट ऑनलाइन मौजूद है। ऐसे में अब ट्रेन के गेट पर शायद ही कोई देखेगा। रेलवे ने कहा है कि ट्रेन के यात्रा शुरू करने के स्टेशन से लेकर बीच में पड़ने वाले स्टेशनों के बीच खाली बर्थ की पूरी जानकारी उपलब्ध होगी। यह पूरी सुविधा मोबाइल और वेब पर दोनों जगह ऑनलाइन सुविधा मौजूद रहेगी।
चार्टिंग सिस्टम बंद करने से रेलवे को करीब 28 टन कागज की बचत होने लगी। जिससे पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचा। वहीं रेलवे को आर्थिक रूप से फायदा हुआ ऑनलाइन रिजर्वेशन चार्ट की सुविधा रेल नेटवर्क के सभी ट्रेनों के लिए मुहैया कराए गए हैं। इस बारे में रेलवे का कहना है कि चार्ट नहीं चिपकाने से कागज की बचत तो होती ही है। ट्रेन भी गंदी नहीं होती है।