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ISRO Chandrayaan-4: चंद्रयान-3 से कितना अलग होगा चंद्रयान-4? दो फेज में होगी लॉन्चिंग, जानें इस मिशन की ऐसी ही कई रोमांचक बातें

ISRO Chandrayaan-4: चंद्रयान-4 देश के इतिहास में ISRO का पहला ऐसा मिशन होगा, जब एक ही मिशन को पूरा करने के मकसद से दो लॉन्च व्हीकल का इस्तेमाल किया जाएगा। इतना ही नहीं ये डुअल-लॉन्च नजरिया भारत की स्पेस रिसर्च क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक बनेगा। यहां जानें धरती से चांद तक कैसे पहुंचेगा चंद्रयान-4 और वहां किस तरह काम करेगा और आगे क्या होगा....

Shubham Sharmaअपडेटेड Mar 06, 2024 पर 9:13 PM
ISRO Chandrayaan-4: चंद्रयान-3 से कितना अलग होगा चंद्रयान-4? दो फेज में होगी लॉन्चिंग, जानें इस मिशन की ऐसी ही कई रोमांचक बातें
ISRO Chandrayaan-4: चंद्रयान-3 से कितना अलग होगा चंद्रयान-4? दो फेज में होगी लॉन्चिंग

ISRO Chandrayaan-4: इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) अपने अगले मून मिशन, चंद्रयान-4 (Chandrayaan-4) को चांद पर भेजने के लिए पूरी तरह तैयार है। चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) की तरह एक बार में नहीं, बल्कि चंद्रयान-4 को दो अलग-अलग फेज में लॉन्च किया जाएगा, जिसमें जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क III (GSLV MK III) और पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) दोनों का इस्तेमाल किया जाएगा। यह मिशन न केवल चंद्रमा पर उतरकर बल्कि चट्टानों और मिट्टी के सैंपल (लूनर रेजोलिथ) को पृथ्वी पर लेकर लौटेगा, जिसके जरिए चांद की सतह और उसकी मिट्टी पर अच्छे से रिसर्च होगी।

चंद्रयान-3 में तीन मुख्य कॉम्पोनेंट्स थे: एक लैंडर, एक रोवर और एक प्रोपल्शन मॉड्यूल। हालांकि, चंद्रयान-4 ज्यादा जटिल होगा, जिसमें पांच अंतरिक्ष यान मॉड्यूल शामिल होंगे, जिनमें से हर एक मिशन की सफलता की गारंटी के लिए एक खास भूमिका निभाएगा। ISRO प्रमुख एस सोमनाथ ने राष्ट्रीय अंतरिक्ष विज्ञान संगोष्ठी में ये सब जानकारी दी थीं।

चंद्रयान-4 को पांच मॉड्यूल ऐसे दिलाएंगे सफलता

इन मॉड्यूल में प्रोपल्शन मॉड्यूल, डिसेंडर मॉड्यूल, एसेंडर मॉड्यूल, ट्रांसफर मॉड्यूल और री-एंट्री मॉड्यूल शामिल हैं। प्रोपल्शन मॉड्यूल चंद्रयान-4 को अलग होने से पहले चांद की कक्षा में डायरेक्शन देगा, जबकि डेसेंडर मॉड्यूल चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) के विक्रम लैंडर की तरह ही मून लैंडिंग कराएगा।

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