भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) जहां अभी चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) की सफल और सॉफ्ट लैंडिंग (Soft Landing) की तैयारी में लगा है, तो वहीं दूसरी तरफ वो अपने अगले मून मिशन (Moon Mission) के लिए भी पूरी जी जान से जुटा है। ऐसी संभावना है कि ISRO अपने अगले मून मिशन को जापान (Japan) की स्पेस एजेंसी के साथ मिलकर अंजाम देगा। इसके लिए तेजी से काम भी किया जा रहा है।
‘जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी’ (Jaxa) और ISRO ने अगले मून मिशन ‘लूनर पोलर एक्सप्लोरेश मिशन’ (LUPEX) के लिए पार्टनरशिप की है। इस मिशन के लिए Jaxa रोवर और ISRO लैंडर डेवलप कर रहा है।
रोवर अपने साथ न केवल ISRO और Jaxa के उपकरणों को चांद तक ले जाएगा, बल्कि अमेरिकी एजेंसी NASA और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के उपकरण भी उसके साथ होंगे।
जापान की राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति पर कैबिनेट समिति के उपाध्यक्ष, जापान की नेशनल एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी के DG साकू त्सुनेता इस महीने के शुरू में बेंगलुरु स्थित ISRO के हेडक्वार्टर आए थे और उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के प्रमुख सोमनाथ एस. के साथ हुई बैठक में LUPEX मिशन की प्रगति पर चर्चा की।
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, ISRO के एक अधिकारी ने बताया, "दूसरे मुद्दों समेत LUPEX मिशन के लिए छोटे लैंडर के निर्माण पर भी चर्चा की गई।"
जाक्सा के मुताबिक, लुपेक्स मिशन का लक्ष्य चंद्रमा पर स्थायी गतिविधियों के लिए आधार बनाने के मकसद से उसके अनुकूल ध्रुवीय इलाके की खोज की संभावना का पता लगाना, चंद्रमा की सतह पर मौजूद जल संसाधन की उपलब्धता को लेकर जानकारी हासिल करना और चंद्रमा और अंतरिक्ष यान के पहुंचाने और वहां रात भर रहने जैसी ग्रहीय सतह खोज तकनीकि का प्रदर्शन करना है।
अंतरिक्ष विभाग के अहमदाबाद स्थित स्वायत्त संस्थान भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) ने लुपेक्स के लिए कई उपकरणों का प्रस्ताव किया है, जिनमें प्रमुख रूप से चंद्रमा के पोलर रीजन में हमेशा में छाया में रहने वाले सरफेस या सब-सरफेस को मापने वाले यंत्र शामिल हैं। ISRO अधिकारी के मुताबिक, लुपेक्स मिशन को 2025 में भेजने की योजना है।