Janganana 2024 Date: अगले साल होगी जनगणना की शुरुआत, आंकड़े 2026 में होंगे प्रकाशित, इस बार संप्रदाय भी पूछेगी सरकार

Janganana 2025 Date: जनगणना का अगला चरण 2021 में शुरू होना था, लेकिन कोविड-19 की दूसरी लहर के कारण इसमें देरी हो गई। बताया जा रहा है कि देश में अब नए सिरे से जनगणना 2025 से शुरू होगी। केंद्र सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने पुष्टि की है कि अगली जनगणना के आंकड़े 2026 में उपलब्ध होंगे

अपडेटेड Oct 28, 2024 पर 11:38 AM
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Janganana 2025 Date: भारत में पिछली बार जनगणना 2011 में दर्ज की गई थी

Janganana 2025 Date: काफी देरी के बाद आखिरकार अब सरकार राष्ट्रीय जनगणना कराने के लिए कमर कस चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक जनगणना अगले साल शुरू होगी। सूत्रों ने बताया कि जनगणना 2025 में शुरू होगी, जो 2026 तक चलेगी। दरअसल, जनगणना का काम अभी भी रुका हुआ है। सरकार ने फिलहाल नए कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। उम्मीद है कि सरकार जल्द ही जनगणना के कार्यक्रम की घोषणा करेगी। लंबे अरसे से अटकी दशकीय जनगणना की कवायद को शुरू किए जाने की संभावनाओं पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अगस्त में कहा था कि यह अभ्यास उचित समय पर किया जाएगा और एक बार निर्णय लेने के बाद मैं खुद घोषणा करूंगा कि इसे कैसे किया जाएगा।

भारत में पिछली बार जनगणना 2011 में दर्ज की गई थी। अगला चरण 2021 में शुरू होना था, लेकिन कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कारण इसमें देरी हो गई। तब से अगली जनगणना के आंकड़े कब प्रकाशित होंगे, इस बारे में कई सवाल पूछे जा रहे हैं। अब केंद्र सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने CNN-News18 से पुष्टि की है कि अगली जनगणना के आंकड़े 2026 में उपलब्ध होंगे। एक शीर्ष सूत्र ने कहा, "डेटा रिकॉर्ड करने की प्रक्रिया 2025 में शुरू होगी और फिर रिपोर्ट 2026 में प्रकाशित होगी।" जनगणना का पहला चक्र अब 2025 से 2035 तक और फिर 2035 से 2045 तक और इसी तरह आगे बढ़ेगा। सूत्रों ने बताया कि परिसीमन प्रक्रिया 2028 तक पूरी होने की संभावना है।

संप्रदाय भी पूछ सकती है सरकार


सरकार जनगणना रिकॉर्ड करने की तैयारी में जुटी हुई है। कुछ राजनीतिक दलों द्वारा जाति जनगणना की मांग के बावजूद न्यूज18 को पता चला है कि फिलहाल सरकार की जाति जनगणना की अनुमति देने की कोई योजना नहीं है। दरअसल, मौजूदा फॉर्म में सर्वेक्षण करने वाला हर व्यक्ति अपना नाम, डिटेल्स, फैमिली डिटेल्स आदि प्रकाशित करता है। वहीं उसके पास धर्म का डिटेल्स दर्ज करने का विकल्प होता है। एक और कॉलम है जो उन्हें अनुसूचित जनजाति या अनुसूचित जाति (SC/ST) के रूप में पहचानता है।

हालांकि, इस बार फॉर्म में एकमात्र अतिरिक्त बात यह होगी कि सर्वेक्षण करने वाले लोगों को अपने धर्म के तहत अपने संप्रदाय का उल्लेख करने की अनुमति होगी। दरअसल, सूत्रों ने बताया कि अब तक जनगणना के दौरान लोगों से उनके धर्म और वर्ग पूछा जाता रहा है। साथ ही सामान्य, अनुसूचित जाति और जनजाति की गणना होती है। हालांकि, इस बार लोगों से यह भी पूछा जा सकता है कि वे किस संप्रदाय के अनुयायी हैं।

विपक्ष कर रहा जाति जनगणना की मांग

कांग्रेस, RJD और कई अन्य पार्टियां जाति जनगणना की मांग कर रही हैं। बिहार में JDU जैसे बीजेपी के गठबंधन सहयोगियों ने भी इस बारे में बात की है, लेकिन केंद्र पर कोई दबाव नहीं डाला है। केंद्रीय स्तर पर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी कैबिनेट पर छोड़ दिया गया है। बीजेपी की दूसरी सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी भी मानती है कि जनगणना होनी चाहिए। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू आम जनता खासकर युवा आबादी के फायदे के लिए 'कौशल जनगणना' की सक्रिय वकालत कर रहे हैं।

इतना ही नहीं, RSS भी जाति जनगणना के पक्ष में है, बशर्ते कि यह किसी पार्टी द्वारा राजनीतिक लाभ के लिए न किया जा रहा हो। इस बीच, सूत्रों ने यह भी कहा कि जब जनगणना के आंकड़े प्रकाशित हो जाएंगे, तो सरकार परिसीमन की प्रक्रिया शुरू कर देगी। इससे आने वाले सालों में देश को अधिक निर्वाचित प्रतिनिधि मिलेंगे। परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण जैसी व्यवस्था लागू की जा सकेगी।

दक्षिण के कई राज्यों खासकर तमिलनाडु ने सख्त जनसंख्या नीति का पालन किया है। इसलिए, सरकार यह देखने के लिए एक प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है कि परिसीमन प्रक्रिया के माध्यम से उनके साथ कोई अनुचित व्यवहार न हो। भारत की जनगणना हर दशक में दर्ज की जाती है। पहली जनगणना 1872 में हुई थी। स्वतंत्रता के बाद पहली जनगणना 1951 में और आखिरी जनगणना 2011 में दर्ज की गई थी।

2011 में हुई थी जनगणना

जनगणना के आंकड़े भारत सरकार के लिए नीति निर्माण और कार्यान्वयन और देश में संसाधनों के समान वितरण को सुनिश्चित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। जनगणना जनसंख्या, जनसांख्यिकी, आर्थिक स्थिति आदि सहित कई पहलुओं पर प्रकाश डालती है। कोरोना वायरस महामारी के कारण जनगणना के अभाव में भारत सरकार अभी भी 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर निर्भर है।

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2011 के आंकड़ों के अनुसार, भारत की जनसंख्या 121.1 करोड़ है, जिसमें 52 प्रतिशत पुरुष और 48 प्रतिशत महिलाएं हैं। इस जनगणना के दौरान ही भारत के इतिहास में पहली बार ट्रांसजेंडर की संख्या को ध्यान में रखा गया था। आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश लगभग 20 करोड़ लोगों के साथ सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। लिस्ट में दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र है जिसकी आबादी 11 करोड़ से अधिक है। लगभग छह लाख के साथ सिक्किम सबसे कम आबादी वाला राज्य है।

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