Joshimath Sinking LIVE: उत्तराखंड के जोशीमठ (Joshimath) में क्षतिग्रस्त घरों की संख्या बढ़कर 723 हो गई है। इस बीच, होटल मालिकों और निवासियों के विरोध के कारण दो होटलों को गिराने का प्रस्तावित काम मंगलवार को पूरा नहीं हो सका। जोशीमठ संकट के कारण गुस्से और निराशा के बीच कुल 131 परिवारों को अस्थायी रिलीफ सेंटरों में शिफ्ट कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस आपदा को देखते हुए जोशीमठ के अंदर 344 राहत शिविर चिह्नित किए गए हैं जिसमें 1,425 लोगों के रहने की व्यवस्था है। वहीं, जोशीमठ से बाहर पीपलकोटी में 491 शिविरों को चिह्नित किया गया है जिसमें 2,205 लोगों के रहने की व्यवस्था की गई है।
'शहर को दोबारा बसाने की कोशिश खतरनाक हो सकती है'
ऐहतियातन इलाके में अवरोधक लगाए गए हैं और होटल एवं उसके आसपास के मकानों में बिजली आपूर्ति रोक दी गई। ताजा डेटा के हवाले से पीटीआई ने बताया कि लोगों को घरों से निकालने के प्रयास जारी रहने के बीच अब तक कुल 131 परिवार अस्थायी राहत केंद्रों में पहुंच गए हैं। वहीं जोशीमठ में दरार पड़ने और जमीन धंसने से प्रभावित घरों की संख्या 723 हो गई है। इस बीच, जोशीमठ का सर्वे कर लौटे IIT कानपुर के राजीव सिन्हा ने दावा किया कि शहर को दोबारा बसाने की कोशिश खतरनाक साबित हो सकती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि वहां 'स्लाइंडिंग जोन' के कारण पत्थर कमजोर हो चुके हैं।
86 घरों की पहचान "असुरक्षित" के रूप में की गई
'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट में बताया गया कि फिलहाल 86 घरों की पहचान "असुरक्षित" के रूप में की गई है और इन सभी के बाहर लाल रंग से 'एक्स' (खतरा) का निशान लगा दिया गया है। डिमॉलिशन (मकानों को ढहाने का काम) के काम में लगाई गई सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CBRI) के मुखिया और चीफ साइंटिस्ट डीपी कानूनगो ने बताया कि हमने मकैनिकल डिमॉलिशन प्लान किया है, जिसमें विस्फोटकों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। यह ऊपर से नीचे चरणों में किया जाएगा, जिसमें तीन से चार दिन का वक्त लगेगा। कंक्रीट कटर्स और अन्य चीजों के जरिए इन्हें (इमारतों) काटा और ढहाया जाएगा।
लोगों ने की मुआवजे की मांग
उत्तराखंड सरकार ने जोशीमठ में भू-धंसाव से बुरी तरह प्रभावित दो होटलों को गिराने की तैयारी कर ली है, लेकिन होटल मालिकों ने इसका विरोध किया। एक अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने सोमवार को ‘माउंट व्यू’ और ‘मालारी इन’ होटलों को गिराने का फैसला किया जिनमें हाल में बड़ी दरार आ गई। दोनों एक-दूसरे की ओर झुक गए हैं। इससे आसपास की इमारतों को खतरा पैदा हो गया है। इलाके में अवरोधक लगा दिए गए हैं। इन होटल तथा आसपास के मकानों में बिजली आपूर्ति रोक दी गई है, जिससे करीब 500 घर बिजली के अभाव का सामना कर रहे हैं।
होटल मालिकों ने कहा कि उन्हें समाचार पत्रों के माध्यम से इस बारे में पता चला। उन्होंने मांग की कि होटल गिराने से पहले उन्हें एकमुश्त निपटान के लिए प्रशासन की ओर से आश्वासन मिलना चाहिए। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने कस्बे के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और लोगों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि लोगों की जान बचाने के लिए जनहित में विध्वंस की कार्रवाई की जा रही है।
अधिकारियों ने सोमवार को कहा था कि राज्य सरकार आपदा प्रभावित कस्बे की जनता के लिए एक राहत पैकेज पर काम कर रही है जिसका प्रस्ताव जल्द केंद्र को भेजा जाएगा। जोशीमठ में घरों और अन्य इमारतों, सड़कों तथा जमीन पर दरारें सामने आने के बाद इसे भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र घोषित किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट 16 जनवरी को सुनवाई के लिए तैयार
सुप्रीम कोर्ट जोशीमठ में जमीन धंसने से उत्पन्न संकट को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के लिये अदालत के हस्तक्षेप के अनुरोध वाली याचिका पर 16 जनवरी को सुनवाई करने पर सहमत हो गया है। CJI डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पी एस नरसिम्हा की पीठ ने हालांकि, तत्काल सुनवाई के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा दायर याचिका को सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया और कहा कि हर जरूरी चीज सीधे न्यायालय के पास नहीं आनी चाहिए।
पीठ ने कहा कि इस पर गौर करने के लिए लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित संस्थाएं हैं। हर जरूरी चीज हमारे पास नहीं आनी चाहिए। हम इसे सुनवाई के लिए 16 जनवरी को सूचीबद्ध करेंगे। बता दें कि बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब जैसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों और अंतरराष्ट्रीय स्कीइंग गंतव्य औली का प्रवेश द्वार कहलाने वाला जोशीमठ जमीन धंसने के कारण एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। जोशीमठ में जमीन धीरे-धीरे धंस रही है और घरों, सड़कों और खेतों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ रही हैं। स्थानीय लोगों ने कहा कि कई घर धंस गए हैं।