Joshimath Sinking: विशेषज्ञों की कई चेतावनियों के बावजूद, आपदा प्रभावित जोशीमठ (Joshimath) इलाके की सैकड़ों इमारतों से घरों में बरसों से बेतरतीब ढंग से पानी बह रहा था। बढ़ते हिमालयी शहर की खराब जल निकासी, अब एक संकट बनकर उभरा है। इस आशंका के साथ कि पानी जमीन में रिस सकता है, जिससे जमीन थोड़ा कमजोर हो सकती है।
बढ़ते संकट को जानने समझने के लिए अब स्टडी और रिसर्ट की जा रही। इस सब के पीछे 520 मेगावाट के पावर प्रोजेक्ट के लिए तपोवन से विष्णुगढ़ तक जोशीमठ के करीब NTPC की 12 किलोमीटर लंबी सुरंग को अहम कारण माना जा रहा है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने तत्काल निर्देश दिया है कि जोशमठ के लिए एक जल निकासी योजना तैयार की जाए, जिस पर वह बिना किसी औपचारिकता के साइन करेंगे। NTPC इस बात से इनकार कर रहा है कि इस संकट के लिए अंडरग्राउंड सुरंग जिम्मेदार है। उसका कहना है कि ये पानी के रिसाव के बिना सूखा है और जोशीमठ शहर से लगभग एक किलोमीटर दूर है।
सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार
दूसरी तरफ जोशीमठ में जमीन धंसने की वजह से पैदा हुए संकट को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के लिए हस्तक्षेप का अनुरोध कर रहे एक याचिकाकर्ता से सुप्रीम कोर्ट ने, उसकी अपील को तत्काल सुनवाई के लिए लिस्टिड करने के मकसद से मंगलवार को इसको मेंशन करने को कहा है।
चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पी एस नरसिम्हा की बेंच ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से पेश हुए वकील परमेश्वर नाथ मिश्रा से यह कहा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने याचिका दाखिल की है।
वकील परमेश्वर नाथ ने याचिका को तत्काल लिस्टिड करने का अनुरोध किया, जिस पर बेंच ने उन्हें प्रक्रिया का पालन करने और मंगलवार को फिर से मेंशन करने के लिए कहा।
बेंच ने कहा, "मंगलवार को जब आपका मामला लिस्टिड किए जाने वाली लिस्ट में हो, तब सही प्रक्रिया का पालन करने के बाद फिर से इसको मेंशन करें।"
सरस्वती ने तर्क दिया है कि बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण के कारण जोशीमठ में यह संकट आया है। उन्होंने उत्तराखंड के लोगों को तत्काल वित्तीय सहायता और मुआवजा दिए जाने की मांग भी की है।
याचिका में मांग की गई है कि इस चुनौतीपूर्ण समय में जोशीमठ के निवासियों को पूर्ण समर्थन देने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) को निर्देश दिया जाए।
याचिका में कहा गया है "मानव जीवन और उनके इकोसिस्टम की कीमत पर किसी भी विकास की जरूरत नहीं है और अगर ऐसा कुछ भी होता है, तो उसे युद्ध स्तर पर तत्काल रोकना राज्य और केंद्र सरकार का दायित्व है।"
बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब जैसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों और अंतरराष्ट्रीय स्कीइंग स्पॉट औली का प्रवेश द्वार कहलाने वाला जोशीमठ जमीन धंसने के कारण एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है।
जमीन धंसने की वजह से जोशीमठ धीरे-धीरे डूब रहा है और घरों, सड़कों और खेतों में बड़ी-बड़ी दरारें आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई मकानों में दरारें आ गई हैं और कुछ तो धंसते जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जोखिम वाले घरों में रह रहे 600 परिवारों को तत्काल वहां से हटा कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का आदेश दिया है।