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पिछले 10 साल में हुए रिफॉर्म्स के चलते दुनिया में सुधरी भारत की छवि: रिधम देसाई

रिधम देसाई ने इस बात को रेखांकित किया कि भारत का कॉर्पोरेट टैक्स इस समय दुनिया के तमाम विकसित देशों के बराबर हो गया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पिछले 8 सालों के दौरान भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी विकास हुआ है। कई नेशनल हाइवे बने हैं। देश में ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबरों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड May 31, 2023 पर 6:19 PM
पिछले 10 साल में हुए रिफॉर्म्स के चलते दुनिया में सुधरी भारत की छवि: रिधम देसाई
रिधम देसाई का मानना है कि 2031 तक भारत की एक्सपोर्ट मार्केट में हिस्सेदारी बढ़कर 4.5 फीसदी हो जाएगी, जो 2021 के स्तर से करीब दोगुना है

मॉर्गन स्टैनली इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर रिधम देसाई का कहना है कि देश में सप्लाई चेन से जुड़ी परेशानियों के निवारण के लिए सरकार की तरफ से किए गए नीतिगत सुधारों, इकोनॉमी के फॉर्मलाइजेशन, इंसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड जैसे कानूनों और रियल एस्टेट सेक्टर के लिए रेरा जैसे कानून ने भारतीय अर्थव्यवस्था के रूप रंग को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये सारे सुधार पिछले एक दशक के दौरान हुए हैं। इसके चलते पूरी दुनिया में भारत की छवि में काफी बड़ा  सुधार हुआ है

31 मई को जारी 'India Equity Strategy and Economics: How India Has Transformed in Less than a Decade'शीर्षक वाली रिपोर्ट में रिधम देसाई ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत ने पिछले एक दशक में वैश्विक मंच पर मजबूत पहचान बनाई है। इसके चलते भारत की मैक्रो इकोनॉमिक स्थितियों और मार्केट आउटलुक पर पॉजिटिव असर देखने को मिला है।

2014 के बाद किए गए रिफॉर्म के चलते सुधरी भारत की छवि

अपनी इस रिपोर्ट में उन्होंने आगे कहा है कि पहले विदेशी निवेशकों के मन में भारत को लेकर तमाम आशंकाएं हुआ करती थी। उनका मानना था कि भारत में तमाम संभावनाएं होने के बावजूद भी इसका प्रदर्शन कमजोर रहा है। दुनिया की सबसे तेजी से ग्रोथ करने वाली दूसरी इकोनॉमी होने और पिछले 25 साल में स्टॉक मार्केट का टॉप परफॉर्मर होने के बावजूद भारत को लेकर विदेशी निवेशकों में तमाम आशंकाएं थी। उनका मानना था कि भारत का इक्विटी बाजार का वैल्यूएशन काफी मंहगा है। लेकिन 2014 के बाद सरकार की तरफ से किए गए रिफॉर्म के चलते भारत को लेकर विदेशी निवेशकों की धारणा में काफी सकारात्मक बदलाव हुए हैं।

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