फर्जी मतदान रोकने के लिए मतदाता कार्ड और सूची को आधार कार्ड से जोड़ा जाएगा
Aadhaar-Voter Card link: अगले साल पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। देश में बहुत जल्द एक ऐसा कानून बन सकता है जिसके तहत आधार कार्ड (Aadhaar Card) और वोटर कार्ड (Aadhaar Card) को एक दूसरे से लिंक कराना अनिवार्य हो सकता है। लोकसभा ने सोमवार को निर्वाचन विधि (संशोधन) विधेयक, 2021 (Election Laws(Amendment) Bill 2021) को मंजूरी दे दी।
इसमें मतदाता सूची में दोहराव और फर्जी मतदान रोकने के लिए मतदाता पहचान कार्ड (voter identity cards) और सूची को आधार कार्ड से जोड़ने का प्रस्ताव किया गया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को चुनाव सुधारों से जुड़े इस विधेयक के मसौदे को अपनी मंजूरी दी थी। इस विधेयक के मसौदे में कहा गया है कि मतदाता सूची में दोहराव और फर्जी मतदान रोकने के लिए मतदाता कार्ड और सूची को आधार कार्ड से जोड़ा जाएगा।
कानून मंत्री किरण रिजिजू ने इस बिल के बारे में बताया कि आधार कार्ड को वोटर लिस्ट के साथ जोड़ना जरूरी नहीं है। यह स्वैच्छिक यानी वॉलेंटरी है। इससे एड्रेस पता करने में मदद होगी। फर्जी वोटिंग को रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा है कि चुनाव सुधार के नजरिए से यह बहुत ही अहम बिल है। अभी की प्रणाली में अगर 2 जनवरी तक आपका नाम मतदाता सूची में नहीं आया तो आपको 1 साल इंतजार करना पड़ता था। अब इसके लिए साल में 4 बार विंडो खुलेगी।
क्या होगा फायदा?
देश में अभी करोड़ों की संख्या में फर्जी वोटर आईडी कार्ड बने हुए हैं। अब नया कानून बनने के बाद ये सभी गायब हो जाएंगे। वोटर आईडी को आधार से लिंक करने पर घुसपैठियों को पकड़ने में मदद मिलेगी। फेक वोटर आईडी के जरिए जो और कई तरह की गैर-कानूनी गतिविधियां हो रही थीं, उन पर भी अंकुश लगेगा।
बिल में क्या है प्रावधान?
विधेयक के मुताबिक, चुनाव संबंधी कानून को सैन्य मतदाताओं के लिए लैंगिक निरपेक्ष बनाया जाएगा। वर्तमान चुनावी कानून के प्रावधानों के तहत, किसी भी सैन्यकर्मी की पत्नी को सैन्य मतदाता के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने की पात्रता है लेकिन महिला सैन्यकर्मी का पति इसका पात्र नहीं है। प्रस्तावित विधेयक को संसद की मंजूरी मिलने पर स्थितियां बदल जाएंगी।
विधेयक के उद्दश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि निर्वाचन सुधार एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। केंद्र सरकार समय समय पर विभिन्न क्षेत्रों से चुनाव सुधार हेतु प्रस्ताव प्राप्त कर रही है जिसमें भारत का चुनाव आयोग भी शामिल है। चुनाव आयोग के प्रस्तवों के आधार पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के उपबंधों में संशोधन करने का प्रस्ताव है । इसी के अनुरूप, निर्वाचन विधि संशोधन विधेयक 2021 प्रस्तावित किया गया है।
इसमें प्रस्ताव किया गया है कि एक ही व्यक्ति के विभिन्न स्थानों पर बहु नामांकन की बुराई को नियंत्रित करने के लिये आधार प्रणाली के साथ निर्वाचक नामावली डाटा को संबंद्ध करने के उद्देश्य से लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 23 का संशोधन करने का उपबंध किया गया है।
इसके साथ ही निर्वाचक नामावलियों को तैयार करने या उनकी पुनरीक्षण करने के संबंध में कट आफ तारीखों के रूप में किसी कैलेंडर वर्ष में एक जनवरी, एक अप्रैल, एक जुलाई और एक अक्टूबर को शामिल करने के लिये लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 14 के खंड (ख) का संशोधन करने की बात कही गई है।
'कट ऑफ तारीख' की वकालत
चुनाव आयोग पात्र लोगों को मतदाता के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने की अनुमति देने के लिए कई ‘कट ऑफ तारीख’ की वकालत करता रहा है। आयोग ने सरकार से कहा था कि एक जनवरी की ‘कट ऑफ तिथि’ के कारण मतदाता सूची की कवायद से अनेक युवा वंचित रह जाते हैं। केवल एक ‘कट ऑफ तिथि’ होने के कारण दो जनवरी या इसके बाद 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले व्यक्ति रजिस्ट्रे नहीं करा पाते थे और उन्हें पंजीकरण कराने के लिए अगले वर्ष का इंतजार करना पड़ता था।
विधि एवं न्याय संबंधी संसदीय समिति द्वारा संसद के जारी शीतकालीन सत्र में हाल में पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि विधि मंत्रालय जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 14-ख में संशोधन करना चाहता है। इस संशोधन में मतदाता रजिस्ट्रेशन के लिए हर साल चार कट ऑफ तिथियों का प्रस्ताव किया गया था।
लिंग निरपेक्ष बनाने का जिक्र
विधेयक के दस्तावेज के अनुसार, कानूनों को लिंग निरपेक्ष बनाने के लिए ‘पत्नी’ शब्द को पति या पत्नी से प्रतिस्थापित करने के लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 20 तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 60 का संशोधन करने का प्रावधान किया गया है।
इसमें कहा गया है कि मतदान केंद्र के रूप में प्रयोग होने वाले, मतदान के बाद गणना, मतपेटियों, वोटिंग मशीनों एवं मतदान संबंधी सामग्रियों के भंडारण के लिए प्रयोग में आने वाले परिसरों को समर्थ बनाने के संबंध में प्रावधान किया गया है।