अब रात में भी महिलाओं की हो सकती है गिरफ्तारी, पुलिस तोड़ सकती है कानून, कोर्ट ने कर दिया साफ

मद्रास हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि, सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच महिलाओं को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, सिवाय खास मामलों में। उन खास मामलों में भी, इलाक़े के मजिस्ट्रेट से पहले इजाज़त लेनी होगी। नियम में यह नहीं बताया गया है कि ख़ास मामला क्या होगा

अपडेटेड Feb 09, 2025 पर 11:01 PM
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अब रात में भी महिला की हो सकती है गिरफ्तारी

Women Arrest Rules : मद्रास हाई कोर्ट ने महिलाओं की गिरफ्तारी के नियमों पर अपने फैसले पर एक बार फिर बड़ी टिप्पणी की है। मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा है कि सूर्यास्त के बाद महिलाओं की गिरफ्तारी पर कानूनी प्रतिबंध और सूर्योदय से पहले अनिवार्य नहीं हैं, बल्कि ये केवल दिशानिर्देश है। हाई कोर्ट ने कहा है कि सूरज ढलने के बाद और सूरज निकलने से पहले महिलाओं को गिरफ्तार न करने का नियम सिर्फ़ एक दिशानिर्देश है, यह जरूरी नहीं है। अब हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस चाहे तो इस नियम को तोड़ भी सकती है।

पहले कोर्ट ने कही थी ये बात

मद्रास हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि, सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच महिलाओं को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, सिवाय खास मामलों में। उन खास मामलों में भी, इलाक़े के मजिस्ट्रेट से पहले इजाज़त लेनी होगी। नियम में यह नहीं बताया गया है कि ख़ास मामला क्या होगा


पुलिस तोड़ सकती है कानून

वहीं अब मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ के न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन और न्यायमूर्ति एम जोतिरमन ने कहा कि, राज्य सरकार विधि आयोग के सुझावों के आधार पर बीएनएसएस की धारा 43 में बदलाव पर विचार कर सकती है। कोर्ट ने बताया कि यदि किसी पुलिस अधिकारी को मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति लेने के बाद ही गिरफ्तारी करनी पड़े, तो यह कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मुश्किलें पैदा कर सकता है। सख्त नियम पुलिस को अपना काम ठीक से करने से रोक सकते हैं।

हालांकि अगर कोई अधिकारी इस प्रक्रिया का पालन नहीं करता, तो उसे कारण बताना पड़ सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सीआरपीसी की धारा 46(4) महिलाओं की सुरक्षा के लिए जरूरी है लेकिन इसे पूरी तरह अनिवार्य नहीं माना जा सकता।

मद्रास हाईकोर्ट ने पहले एक मामले में अधिकारियों को उचित दिशा-निर्देश बनाने को कहा था। इसके बाद पुलिस उपमहानिदेशक ने महिलाओं की गिरफ्तारी को लेकर दिशानिर्देश जारी किए। हालांकि, ये दिशानिर्देश सिर्फ कानून की भाषा दोहराते हैं और उन चुनौतियों पर ध्यान नहीं देते, जिनका सामना गिरफ्तार करने वाले अधिकारी अपने कर्तव्य निभाते समय करते हैं। मद्रास हाईकोर्ट ने यह निर्देश तीन पुलिस अधिकारियों की अपील पर सुनवाई के दौरान दिया। ये अधिकारी हाईकोर्ट की मदुरै पीठ के उस आदेश को रद्द करवाना चाहते थे, जिसमें विजयलक्ष्मी की गिरफ्तारी के दौरान धारा 46(4) के उल्लंघन के लिए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई और मुआवजे का आदेश दिया गया था।

विजयलक्ष्मी को 14 जनवरी 2019 की रात 8 बजे मदुरै पुलिस ने गिरफ्तार किया, लेकिन न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति नहीं ली गई। अदालत ने सुनवाई के बाद सब-इंस्पेक्टर दीपा की अपील खारिज कर दी, जबकि इंस्पेक्टर अनीता और हेड कांस्टेबल कृष्णवेणी की अपील मंजूर कर ली और उन पर लगी सजा हटा दी।

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