उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार कुंभ की आर्थिक उपयोगिता पर खूब जोर देती रही है। यूपी की बीजेपी सरकार का तर्क रहा है कि इस आयोजन से आर्थिक गतिविधियों को बल मिलता है और प्रदेश इकोनॉमिक बूस्ट मिलता है। यूपी सरकार को उम्मीद की है कि इस बार कुंभ में दो लाख करोड़ की आर्थिक गतिविधियां हो सकती हैं।
इस बार कुंभ का आयोजन इसलिए स्पेशल है क्योंकि इसे पूर्ण कुंभ कहा जा रहा है जो हर 144 साल में आयोजित होता है। इससे पहले 1882 में प्रयाग में पूर्ण कुंभ का आयोजन हुआ था। कुंभ की आर्थिक प्रासंगिकता की बात करें तो उस वक्त भी अंग्रेजी सरकार ने कुंभ पर करीब 20 हजार रुपये खर्च किए थे। सरकार को कुंभ के आयोजन से करीब 50 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था जिसे बाद में शहर के विकासकार्यों में लगाया गया था।
ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स में दर्ज है खर्च का ब्योरा
ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स में यह बात दर्ज है कि 1882 के कुंभ के आयोजन के दौरान सरकार द्वारा कितना खर्च किया गया और कितना राजस्व प्राप्त हुआ। उस वक्त नॉर्थ वेस्ट प्रोविंस के सेक्रेटरी AR रीड ने कुंभ के आयोजन पर एक रिपोर्ट तैयार की थी जिसमें इन सारी बातों का जिक्र है।
सरकार को मिला था कितना राजस्व
रिपोर्ट के मुताबिक 1882 के पूर्ण कुंभ में अंग्रेजी सरकार ने मेले के आयोजन के लिए 20,228 रुपये खर्च किए थे। सरकार को इस आयोजन से 49,840 रुपये राजस्व प्राप्त हुए थे यानी करीब 250 प्रतिशत मुनाफा मिला था। रीड की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने इस राशि को शहर के विकास कार्यों में खर्च किया था।
इस बार कुंभ में 6382 करोड़ का बजट
इस बार के कुंभ आयोजन की बात करें तो करीब चार हजार हेक्टेयर में मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस पूरे आयोजन के दौरान 40-45 करोड़ श्रद्धालुओं के प्रयाग पहुंचने की उम्मीद है। 45 दिनों के इस आयोजन के लिए सरकार ने 6382 करोड़ रुपये का बजट अलॉट किया है। इसमें से 5600 करोड़ पहले ही इवेंट मैनेजमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए अलॉट किए जा चुके हैं। इससे पहले 2019 के अर्धकुंभ में सरकार ने 3700 करोड़ रुपये खर्च किए थे।
इस बार कुंभ की आर्थिक गतिविधियों को लेकर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार और पूर्व IAS अधिकारी अवनीश अवस्थी और भी ज्यादा आशांवित हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अवस्थी का कहना है कि कुल आर्थिक गतिविधि 3.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
वह कहते हैं-आर्थिक गतिविधि का तात्कालिक आकलन वास्तविक स्थिति को कम करके आंकने जैसा हो सकता है। अगर कुंभ में आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु 8 हजार रुपये भी खर्च करता है तो आंकड़ा 3.2 लाख करोड़ रुपये तक जा सकता है। यह बात इस पर निर्भर करेगी कि आंकलन के मुताबिक श्रद्धालु प्रयाग में पहुंचें।
उत्तर प्रदेश टूरिजम डिपार्टमेंट के मुताबिक कुंभ के आयोजन में अब तक 45 हजार परिवारों को रोजगार का लाभ पहले ही मिल चुका है। मेले की तैयारी के लिए शहर के ज्यादातर विकासकार्य पूरे होने की कगार पर हैं या फिर पूरे हो चुके हैं। बड़े प्रोजेट्स, जैसे गंगा नदी पर 6 लेन का पुल और 275 करोड़ की लागत से बना चार लेन का ओवरब्रिज, पूरे हो चुके हैं। शहर कुंभ के आयोजन के लिए पूरी तरह तैयार दिख रहा है।