कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने बुधवार 24 जुलाई को संसद में चर्चा के दौरान बजट (Budget 2024-25) की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह बजट के देश के अधिकतर राज्यों के भेदभाव करता है। खड़गे ने कहा कि बिहार और आंध्र प्रदेश को छोड़ दें तो बाकी सभी राज्यों की 'प्लेटें' खाली रह गईं। इससे एक दिन पहले मंगलवार 23 जुलाई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने लगातार सातवीं बार बजट पेश किया। यह मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट भी था।
खड़गे ने तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों का नाम लेते हुए कहा, "किसी भी राज्य को कुछ नहीं मिला।" कर्नाटक से आने वाले खड़गे ने कहा कि उन्हें अपने राज्य के लिए बजट में कुछ आवंटन की उम्मीद थी। लेकिन उनके राज्य को भी कुछ नहीं दिया गया। इस दौरान जब राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने विपक्ष के नेता से सीतारमण को जवाब देने का मौका देने के लिए कहा, तो खड़गे ने कहा, "मैं बोल देता हूं। माताजी बोलने में तो एक्सपर्ट हैं मुझे मालूम है।"
उन्होंने कहा, "ये कुर्सी बचाने के लिए ये सब हुआ है।" खड़गे ने कहा कि 'इंडिया' गठबंधन के सभी दल बजट का विरोध करेंगे। सीनियर कांग्रेस नेता ने राज्यसभा से वॉकआउट करने से पहले कहा, "... अगर संतुलन नहीं होगा तो फिर विकास कैसे होगा?"
इस बीच, सीतारमण ने बजट आवंटन में राज्यों के साथ भेदभाव के आरोप का जवाब देते हुए कहा कि बजट भाषण में हर राज्य का नाम नहीं लिया जा सकता।
पालघर जिले में प्रस्तावित गहरे समुद्र के बंदरगाह का जिक्र करते हुए सीतारमण ने कहा, "मैं उदाहरण के लिए महाराष्ट्र का नाम लेती हूं। अंतरिम बजट और कल के फुल बजट के बीच, कैबिनेट ने वधावन में एक बहुत बड़ा बंदरगाह बनाने के अहम फैसले को मंजूरी दी। उन्होंने कहा, "ऐसे में यह नहीं कह सकते हैं कि महाराष्ट्र को नाम नहीं लिया तो इसका मतलब यह है कि महाराष्ट्र को नजरअंदाज किया गया है।"
सीतारमण ने कांग्रेस पर जानबूझकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। सीतारमण ने कहा, "मैं जिम्मेदारी के साथ कह रही हूं कि यह कांग्रेस की अगुआई वाली विपक्षी पार्टियों की ओर से 'जानबूझकर किया गया प्रयास' है, ताकि लोगों के मन में यह गलत धारणा बसाई जा सके कि उनके राज्यों को बजट में किसी योजना या पैसा आवंटित नहीं किया गया है।"