भारत में चोरी और लूट के मोबाइल भेजे जा रहे हैं पाकिस्तान, फिर डी कंपनी करती है यह काम...

दाऊद इब्राहिम की डी कंपनी इन मोबाइल फोन्स का इस्तेमाल Extortion, Narco Terrorism, Terror Funding, Terror operations, Arms Dealing, Fake Currency, Hawala के लिए इस्तेमाल करती है

अपडेटेड Sep 08, 2022 पर 4:01 PM
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पुलिस ने मोबाइल चोरी करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है

भारत से लूट और चोरी किए गए मोबाइल पाकिस्तान, बांग्लादेश और खाड़ी देशों में भेजे जा रहे हैं। पड़ोसी देशों में ये मोबाइल बिहार, मुंबई और गुजरात से कूरियर के जरिए भेजे जाते हैं। इस मामले में दिल्ली साइबर क्राइम ने एक बड़ा खुलासा किया है। साइबर क्राइम ने जिस गिरोह का पर्दाफाश किया है। उसने अब तक 500 से ज्यादा मोबाइल पड़ोसी देशों में भेज चुके हैं। वहीं देश की तमाम सुरक्षा एजेंसियों ने भी एक मीटिंग में इस बात का जिक्र किया है कि भारत के चोरी किए गए मोबाइल पाकिस्तान भेजे जा रहे हैं।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 19 मोबाइल फोन, दो देशी कट्टे और 6 कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस पड़ोसी देश भेजने वाले और कूरियर कंपनी के मालिक की तलाश कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में सब्सिडियरी मल्टी इंटेलिजेस यूनिट की एक मीटिंग हुई थी। जिसमें IB, NIA, DRI, Customs, Military Intelligence, State Intelligence जैसी जांच एजेंसियों ने हिस्सा लिया। इस मीटिंग में मुंबई क्राइम ब्रांच ने खुलासा किया है कि देशभर में चोरी होने वाले स्मार्ट फोन को चोरी छिपे बांग्लादेश भेजा जाता है। इसके बाद इन मोबाइल फोन्स को पाकिस्तान भेज दिया जाता है। फिर इसके बाद पाकिस्तान में बैठे टेक्नो एक्सपर्ट इन मोबाइल नंबर्स के IMEI नंबर मैनिपुलेट (manipulate) कर देते हैं। यानी एक IMEI नंबर पर चोरी किए गए 40 से 50 मोबाइल नम्बरों एक साथ एक्टिव हो जाते हैं।

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डी कंपनी करती है इस्तेमाल

फिर वहां से दाऊद इब्राहिम की डी कंपनी इन मोबाइल फोन्स का इस्तेमाल करती है। डी कंपनी इन मोबाइल फोन का जबरन वसूली (Extortion), नार्को आतंकवाद (Narco Terrorism), टेरर फंडिंग (Terror Funding), टेरर ऑपरेशन (Terror operations), आर्म्स डीलिंग ( Arms Dealing), नकली करेंसी (Fake Currency) और हवाला (Hawala) जैसे धंधों के लिए इस्तेमाल करती है।

पुलिस की पकड़ से बाहर

IMEI नंबर को मैनुप्लेट करने वाले जांच एजेंसी के पकड़ में भी नहीं आ पाते हैं। एजेंसियां अब उन लोगो की पहचान करने में जुटी हैं, जो इस तरह से लैपटॉप्स, मोबाइल फोन्स के IMEI नंबर्स को मैनिपुलेट करते हैं।

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