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मां, मोदी और मानवीय रिश्ते निभाने का महागुण!

मेरी मां से मिलने के बाद नरेंद्र मोदी उन्हें भूल नहीं गये। जब भी उनसे मुलाकात हुई, सबसे पहले मां की सेहत के बारे में विस्तार से पूछा। वो भी सिर्फ औपचारिकता के नाते नहीं, बल्कि हृदय की गहराइयों से

Brajesh Kumar Singhअपडेटेड Jun 23, 2024 पर 6:09 PM
मां, मोदी और मानवीय रिश्ते निभाने का महागुण!
नेटवर्क 18 के ग्रुप एडिटर-कन्वर्जेंस ब्रजेश कुमार सिंह की मां राजरानी देवी के निधन पर सांत्वना जताते हुए पीएम नरेंद्र मोदी का पत्र

अम्मा नहीं रहीं। बीस तारीख की रात 11 बजे के करीब उनका निधन हो गया। पिछले कुछ वर्षों से बीमार चल रही थीं, स्मृति दोष, डिमेंशिया की शिकार थीं। ये उस मजबूत इच्छा शक्ति की महिला के लिए अजीब सा था, जिसकी सक्रियता का स्तर सामान्य से ज्यादा था, शरीर से लेकर दिमागी स्तर तक। डिमेंशिया की वजह से मेरी मां के आखिरी कुछ वर्ष बिस्तर पर ही बीते, शरीर से पूरी तरह स्वस्थ होने के बावजूद। डिमेंशिया की वजह से कुछ भी याद नहीं रहा था, खाना तक भूल गई थीं वो।

मां अपने गांव से पूरी तरह जुड़ी थीं, गांव यानी ससुराल नहीं, उनके मायके का गांव। बिहार के गोपालगंज जिले का हलुआर पीपरा गांव। बिहार में पीपरा नाम से बहुत सारे कस्बे और गांव हैं, इसलिए इस पीपरा की विशेष पहचान के लिए इसे हलुआर पीपरा के तौर पर जाना गया। हलुआर बगल का गांव है, इसलिए हलुआर पीपरा।

मां की मृत्यु दिल्ली से सटे गाजियाबाद के इंदिरापुरम में हुई। इंदिरापुरम की एक सोसायटी में हम दोनों भाई रहते हैं, बड़े भाई बैंकिंग सेक्टर में हैं। मृत्यु के वक्त मां भैया वाले फ्लैट पर थीं। मां की मौत के बाद तय हुआ कि अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव पीपरा में ही किया जाए। आखिर अम्मा अपने पूरे जीवन में सबसे अधिक समय यही रहीं। चाहे बचपन में स्कूली छात्रा के तौर पर या फिर शिक्षिका के तौर पर। 1998 में वो सरकारी सेवा से रिटायर हो गई थीं, तब तक भैया को स्टेट बैंक की नौकरी करते हुए दस साल हो गये थे और मुझे पत्रकारिता में तीन साल।

पीपरा से जुड़ी थी मां की पहचान

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