देश भर में चल रहे मंदिर-मस्जिद विवाद (Mandir Masjid Row) के बीच हिंदुत्व से जुड़े संगठन महाराणा प्रताप सेना (Maharana Pratap Sena) ने दावा किया है कि अजमेर शरीफ (Ajmer Sharif) भगवान शिव का मंदिर (Shiv temple) है। संगठन ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) को भी पत्र लिखकर इसकी जांच भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से कराने की मांग की है।
महाराणा प्रताप सेना के पदााधिकारियों ने एक तस्वीर भी शेयर की है। इसमें अजमेर शरीफ दरगाह की खिड़कियों पर स्वास्तिक चिन्ह देखे जा सकते हैं। MPS के संस्थापक राजवर्धन सिंह परमार का दावा है कि अजमेर में हजरत ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह एक प्राचीन शिव मंदिर था।
उन्होंने पूछा कि दरगाह के अंदर स्वस्तिक का क्या मतलब है? उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और केंद्र को इसकी जांच करनी चाहिए। एक सप्ताह में जांच नहीं हुई, हम तो केंद्रीय मंत्रियों से मिलेंगे। राजवर्धन सिंह परमार ने आगे कहा कि सर्वे नहीं होने पर आंदोलन भी किया जाएगा।
वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद पर कानूनी लड़ाई के बीच, श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद के बीच एक और भूमि विवाद मथुरा में सामने आया है। इसमें हिंदू महासभा ने शाही ईदगाह मस्जिद की 'शुद्धि' की मांग के लिए दीवानी अदालत में याचिका दायर की है। याचिका पर एक जुलाई को सुनवाई होनी है।
विवाद में अनिवार्य रूप से 13.37 एकड़ भूमि का स्वामित्व शामिल है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह देवता भगवान श्री कृष्ण का है। शाही ईदगाह मस्जिद कुल 13.37 एकड़ जमीन में से 2.37 एकड़ में बनी है।
इस बीच, तेजतर्रार BJP नेता उमा भारती ने कहा है कि अयोध्या, काशी और मथुरा हिंदुओं के लिए आस्था का विषय ठीक वैसे ही हैं, जैसे मुसलमानों के लिए मक्का-मदीना है।
मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "ये जगह मुसलमानों के लिए मक्का-मदीना और ईसाइयों के लिए वेटिकन सिटी जैसे लाखों हिंदुओं के लिए सेंटर स्टेज हैं।" उन्होंने कहा कि समाज में सद्भावना बनाए रखने के लिए इन मुद्दों का समाधान किया जाना चाहिए।