Qutub Minar Case: कुतुब मीनार (Qutub Minar) परिसर में सुनवाई फिलहाल दिल्ली की एक अदालत (Delhi Court) में चल रही है। अपीलकर्ताओं में से एक, हरि शंकर जैन ने मंदिरों को दोबारा बनाए जाने और परिसर में पूजा करने की मांग की है। इस पर कोर्ट ने कहा है कि अगर अनुमति दी गई, तो संविधान के ताने-बाने और धर्मनिरपेक्ष चरित्र को नुकसान होगा।
अदालत ने पूछा, "अब आप चाहते हैं कि इस स्मारक को जीर्णोद्धार कहकर मंदिर में बदल दिया जाए। हमारा सवाल यह है कि आप यह कैसे दावा करेंगे कि वादी को यह मानने का कानूनी अधिकार है कि यह लगभग 800 साल पहले मौजूद था?"
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने दिल्ली की एक अदालत के सामने कहा है कि कुतुब मीनार परिसर एक स्मारक है। ASI ने कहा कि कोई भी ऐसा स्ट्रक्चर पर मौलिक अधिकार का दावा नहीं कर सकता है।
दरअसल इस याचिका में मांग की गई थी कि कुतुब मीनार के निर्माण के लिए कथित रूप से तोड़े गए 27 मंदिरों को दोबारा से बनवाया जाए। इस याचिका के जवाब में ASI ने अदालत में एक हलफनामा दायर किया है।
ASI ने इसमें कहा कि प्राचीन स्मारक अधिनियम के अनुसार, कुतुब मीनार परिसर एक स्मारक है। इस जगह पर किसी को भी पूजा करने का कोई अधिकार नहीं दिया जा सकता है।
ASI ने कहा, "एक स्मारक में पूजा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इसे 'संरक्षित' का दर्जा दिए जाने के दौरान यहां ऐसी कोई प्रथा नहीं थी।"
ASI के पूर्व अधिकारी का कुछ और ही दावा
दरअसल ASI के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक धर्मवीर शर्मा ने दावा किया कि कुतुब मीनार का निर्माण कुतुब अल-दीन ऐबक ने नहीं बल्कि, राजा विक्रमादित्य ने कराया था। उन्होंने सूर्य की दिशा का अध्ययन करने के लिए ये मीनार बनवाई थी।
इस बीच, संस्कृति मंत्रालय दिल्ली के कुतुब मीनार परिसर में मिली हिंदू और जैन मूर्तियों की आइकोनोग्राफी कराने पर विचार कर रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि कुतुब मीनार परिसर में खुदाई करने या किसी भी धार्मिक प्रथा को रोकने की की कोई योजना नहीं है।